RAIPUR NEWS. छत्तीसगढ़ में सुरक्षा व्यवस्था को तकनीकी मजबूती देने के लिए केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने ‘अत्याधुनिक डायल 112’ और फॉरेंसिक मोबाइल वैन को हरी झंडी दिखा दी है। छत्तीसगढ़ में शुरू की गई अत्याधुनिक डायल-112 सेवा सिर्फ एक हेल्पलाइन नहीं, बल्कि राज्य की पूरी आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली को तकनीकी रूप से मजबूत करने वाला बड़ा बदलाव मानी जा रही है। इसकी खासियत कई स्तरों पर दिखाई देती है।
आइए इन 8 प्वाइंट्स से नया डायल-112 सिस्टम समझें –

अब पूरे राज्य में एक समान आपातकालीन सेवा
पहले डायल-112 सेवा केवल 16 जिलों तक सीमित थी, लेकिन अब इसे राज्य के सभी 33 जिलों में लागू कर दिया गया है। इससे दूरस्थ और नक्सल प्रभावित इलाकों तक भी त्वरित पुलिस सहायता पहुंच सकेगी।
एआई आधारित लोकेशन ट्रैकिंग
नई व्यवस्था में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित स्थान पहचान प्रणाली जोड़ी गई है। यदि कोई व्यक्ति घबराहट या संकट की स्थिति में अपनी लोकेशन ठीक से नहीं बता पाए, तब भी सिस्टम उसकी वास्तविक स्थिति का पता लगाने में मदद करेगा। यह फीचर महिलाओं, बच्चों और दुर्घटना पीड़ितों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

कई माध्यमों से मदद मांगने की सुविधा
अब सहायता सिर्फ फोन कॉल तक सीमित नहीं रहेगी। नागरिक 112 इंडिया एप, एसएमएस, ईमेल, वेब प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया के जरिए भी मदद मांग सकेंगे। इंटरनेट आधारित यह सुविधा युवाओं और शहरी क्षेत्रों के लिए खास उपयोगी होगी।
महिला सुरक्षा को प्राथमिकता
डायल-112 सिस्टम में पैनिक बटन और विशेष निगरानी फीचर जोड़े गए हैं। इससे आपात स्थिति में महिलाएं तुरंत पुलिस सहायता से जुड़ सकेंगी। पुलिस, एम्बुलेंस और महिला हेल्पलाइन को एकीकृत प्लेटफॉर्म पर जोड़ना इसकी बड़ी ताकत है।

हाईवे और दूरदराज इलाकों में तेज प्रतिक्रिया
राज्य में 60 नए हाईवे पेट्रोलिंग वाहन और 400 आपातकालीन वाहन उतारे गए हैं। इससे सड़क दुर्घटनाओं, अपराध और आपदा की घटनाओं पर प्रतिक्रिया समय कम होने की उम्मीद है।
तकनीकी खराबी में भी सेवा बंद नहीं होगी
रायपुर के मुख्य कंट्रोल रूम के साथ नया रायपुर में बैकअप कंट्रोल सेंटर बनाया गया है। किसी तकनीकी खराबी या आपदा की स्थिति में भी सेवा लगातार जारी रहेगी।

नक्सल प्रभावित राज्य के लिए बड़ी जरूरत
छत्तीसगढ़ लंबे समय से नक्सल प्रभावित राज्य रहा है। ऐसे में त्वरित लोकेशन ट्रैकिंग, तेज पुलिस रिस्पॉन्स और आधुनिक निगरानी व्यवस्था सुरक्षा बलों और आम नागरिकों दोनों के लिए अहम मानी जा रही है।
राष्ट्रीय स्तर की आधुनिक इमरजेंसी व्यवस्था की ओर कदम
यह सिस्टम पुलिस, फायर ब्रिगेड, एम्बुलेंस और महिला सहायता सेवाओं को एक मंच पर लाकर “वन नेशन, वन इमरजेंसी रिस्पॉन्स” मॉडल की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।




































