LUCKNOW NEWS. उत्तर प्रदेश की राजनीति में आज का दिन बेहद महत्वपूर्ण रहा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने दूसरे कार्यकाल का दूसरा बड़ा मंत्रिमंडल विस्तार करते हुए 6 नए मंत्रियों को शपथ दिलाई। राजभवन के जनभवन में आयोजित भव्य समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने नए मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस विस्तार के साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्रियों की कुल संख्या अब 60 हो गई है, जो कि संवैधानिक रूप से अधिकतम स्वीकृत सीमा है।

किसे मिली कैबिनेट में जगह?
इस विस्तार में जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों (Social Engineering) का खास ख्याल रखा गया है। शपथ लेने वाले प्रमुख नाम इस प्रकार हैं:
- भूपेंद्र सिंह चौधरी (कैबिनेट मंत्री): पश्चिमी यूपी के कद्दावर जाट नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष। उन्हें दोबारा कैबिनेट में शामिल कर जाट वोट बैंक को साधने की कोशिश की गई है।
- मनोज कुमार पांडेय (कैबिनेट मंत्री): रायबरेली के ऊंचाहार से विधायक और पूर्व सपा नेता। हाल ही में भाजपा में शामिल हुए पांडेय को कैबिनेट मंत्री बनाकर ब्राह्मण वोट बैंक पर पकड़ मजबूत करने का संदेश दिया गया है।

- कृष्णा पासवान (राज्य मंत्री): दलित समुदाय से आने वाली कृष्णा पासवान को शामिल कर पार्टी ने अनुसूचित जाति वर्ग को प्रतिनिधित्व दिया है।
- सुरेंद्र दिलेर (राज्य मंत्री): हाथरस क्षेत्र के प्रभावी दलित नेता।
- हंसराज विश्वकर्मा (राज्य मंत्री): वाराणसी के कद्दावर नेता और ओबीसी चेहरा।
- कैलाश सिंह राजपूत (राज्य मंत्री): लोध समुदाय के प्रतिनिधि के रूप में मंत्रिमंडल में जगह मिली।
इसके अलावा, दो मौजूदा राज्य मंत्रियों— अजीत पाल सिंह और सोमेंद्र तोमर को प्रमोट कर राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया है।

नए मंत्रियों का बैकग्राउंड और मंत्रालयों का आवंटन
मंत्रालयों का औपचारिक आवंटन जल्द ही आधिकारिक सूची के माध्यम से स्पष्ट होगा, हालांकि सूत्रों के अनुसार भूपेंद्र चौधरी को पंचायती राज या ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण विभाग मिल सकते हैं, जबकि मनोज पांडेय को शिक्षा या संसदीय कार्य विभाग की जिम्मेदारी दी जा सकती है।

नए मंत्रियों के चयन में भाजपा ने 2027 के विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखा है। जहां मनोज पांडेय के जरिए सपा के गढ़ में सेंधमारी की तैयारी है, वहीं हंसराज विश्वकर्मा और कैलाश राजपूत के जरिए पिछड़ी जातियों को लामबंद करने की रणनीति साफ दिख रही है।

अब कितनी हुई मंत्रियों की संख्या?
संविधान के 91वें संशोधन के अनुसार, उत्तर प्रदेश विधानसभा की कुल 403 सीटों के आधार पर अधिकतम 60 मंत्री (मुख्यमंत्री सहित) हो सकते हैं। इस विस्तार से पहले मंत्रिमंडल में 54 सदस्य थे। आज 6 नए मंत्रियों के शपथ लेने के बाद यह आंकड़ा 60 पर पहुंच गया है, यानी अब कैबिनेट में कोई जगह खाली नहीं बची है।
उत्तर प्रदेश की अन्य ख़बरें
UP B.Ed New Rules 2026: अब 20 हफ्ते की इंटर्नशिप अनिवार्य, जानें क्या है नया शेड्यूल और नियम
शिक्षा मित्रों पर योगी की ‘मेहरबानी’: चुनावी रण में कितना कारगर होगा मानदेय वृद्धि का दांव?


































