LUCKNOW NEWS. उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा विभाग ने बीएड (B.Ed) प्रशिक्षुओं के लिए एक बड़ा और महत्वपूर्ण बदलाव लागू किया है। राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) के मानकों को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से अब प्रदेश के सभी बीएड कॉलेजों में 20 सप्ताह की अनिवार्य इंटर्नशिप का नियम सख्ती से लागू कर दिया गया है। इस नए कदम से न केवल शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि भावी शिक्षकों को जमीनी स्तर पर शिक्षण का वास्तविक अनुभव भी मिल सकेगा।

क्या है 20 हफ्ते का नया इंटर्नशिप शेड्यूल?
नए नियमों के अनुसार, दो वर्षीय बीएड पाठ्यक्रम में शामिल छात्रों को अपनी पढ़ाई के दौरान कुल 20 हफ्तों तक स्कूलों में जाकर पढ़ाना होगा। इस अवधि को दो भागों में विभाजित किया गया है:

- प्रथम वर्ष: छात्रों को पहले साल में 4 सप्ताह की प्रारंभिक इंटर्नशिप करनी होगी। इसमें मुख्य रूप से स्कूल की कार्यप्रणाली को समझने और अवलोकन (Observation) पर जोर रहेगा।
- द्वितीय वर्ष: दूसरे साल में इंटर्नशिप की अवधि बढ़ाकर 16 सप्ताह कर दी गई है। इस दौरान प्रशिक्षुओं को पूरी तरह से कक्षाओं का संचालन करना होगा और नियमित शिक्षक की भूमिका निभानी होगी।

राजकीय और सहायता प्राप्त स्कूलों को प्राथमिकता
उच्च शिक्षा विभाग के आदेशानुसार, बीएड प्रशिक्षुओं को इंटर्नशिप के लिए प्राथमिकता के आधार पर राजकीय माध्यमिक विद्यालयों (Government Schools) में भेजा जाएगा। जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) की देखरेख में स्कूलों का आवंटन किया जाएगा। यदि किसी बीएड कॉलेज के पास राजकीय स्कूल उपलब्ध नहीं है, तभी छात्रों को सहायता प्राप्त या निजी स्कूलों में इंटर्नशिप के लिए भेजा जा सकेगा।

क्यों पड़ी इस बदलाव की जरूरत?
अब तक कई बीएड कॉलेजों में इंटर्नशिप केवल कागजी खानापूर्ति तक सीमित रहती थी, जिससे छात्रों को वास्तविक क्लासरूम टीचिंग का अनुभव नहीं मिल पाता था। 20 हफ्ते के इस नए नियम का उद्देश्य छात्रों को स्कूल प्रबंधन, मिड-डे मील संचालन, रजिस्टर मेंटेनेंस और बच्चों के साथ व्यावहारिक जुड़ाव सिखाना है। इसके साथ ही, जिन स्कूलों में शिक्षकों की कमी है, वहां ये बीएड छात्र शिक्षण कार्य में सहयोग प्रदान कर सकेंगे।

एनईपी 2020 की ओर बढ़ते कदम
यह बदलाव नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के उन लक्ष्यों का हिस्सा है, जिसके तहत 2030 तक सभी शिक्षक प्रशिक्षण संस्थानों को बहुविषयक (Multidisciplinary) बनाने की योजना है। शिक्षा विभाग ने साफ किया है कि जो छात्र इस अनिवार्य इंटर्नशिप को पूरा नहीं करेंगे, उन्हें डिग्री प्रदान करने में कठिनाई आ सकती है।
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