GWALIOR NEWS. डॉ. आंबेडकर पर विवादित बयान के बाद अनुसूचित जाति संगठनों ने आज 15 अक्टूबर को आंदोलन का ऐलान किया है। इसके जवाब में सवर्ण समाज की चुनौती के बाद शहर में तनावपूर्ण माहौल बन गया है। हालांकि, सोमवार को प्रशासन के साथ बैठकर दोनों पक्षों ने आंदोलन नहीं करने पर सहमति दी थी।

मगर, फिर भी प्रशासन ने एहतियातन कड़े बंदोबस्त किए हैं। शहरभर में करीब चार हजार जवानों की तैनाती की गई है। नाकों से लेकर बाजारों तक पुलिस चेकिंग कर रही है। आईजी, डीआईजी और एसएसपी खुद हालात की निगरानी कर रहे हैं।
इतना ही नहीं, सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए छह जिलों की सीमाओं पर नाकाबंदी की गई है। शहर के अंदर 70 चेकिंग पाइंट बनाए गए हैं। पुलिस जवान बलवा किट के साथ तैयार हैं ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति का तुरंत सामना किया जा सके।

मंगलवार को सीएसपी से हुई थी नोंकझोंक
बताते चलें कि मंगलवार को शहर के एक मंदिर में हिंदूवादी संगठनों और सीएसपी हिना खान के बीच टकराव की स्थिति बन गई थी। रक्षक मोर्चा और एडवोकेट अनिल मिश्रा मंदिर के अंदर प्रवेश करने की कोशिश कर रहे थे। मगर, पुलिस ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया।
“My Kind Of Indian”
DSP Hina Khan in Gwalior. The supporters of Advocate Mishra tried provoking her by श्री राम chants and in response she chanted जय श्री राम. Confining prabhu Ram in selective compartments is pure ignorance. Prabhu Ram is religion neutral. He is the essence of… pic.twitter.com/lxN9DVQSas
— Lt Col Sushil Singh Sheoran, Veteran (@SushilS27538625) October 14, 2025
विवाद के दौरान अनिल मिश्रा ने सीएसपी हिना से कहा कि उन्हें मंदिर में जाने से रोकना गलत है। यह सनातन धर्म के खिलाफ है। उन्होंने जय श्रीराम के नारे लगाए। इस पर सीएसपी हिना ने कहा कि यह सनातन का विरोध नहीं है। राम सभी के हैं। जय जय श्रीराम, जय श्रीराम।

उनका यह जवाब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है। इस घटना के बाद मंदिर और धार्मिक अधिकारों पर नई बहस शुरू हो गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मंदिर में प्रवेश और धार्मिक स्वतंत्रता पर प्रशासन को स्पष्ट नीति बनानी चाहिए।

प्रशासन सख्त, बिना अनुमति नहीं होगी कोई गतिविधि
स्थानीय प्रशासन ने साफ किया है कि मंदिर परिसर में किसी भी गतिविधि से पहले प्रशासनिक अनुमति जरूरी होगी। सीएसपी हिना खान ने कहा कि ग्वालियर में कानून और शांति बनाए रखना पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

उन्होंने बताया कि प्रदर्शनकारियों को समझाया गया कि जब कोई व्यवस्था लागू है तो उसका पालन करना सबकी जिम्मेदारी है। शहर की शांति और लोगों के जीवन पर असर डालने वाली किसी भी स्थिति को स्वीकार नहीं किया जाएगा।




































