करदाता अपने टैक्स कंसल्टेंट को सभी बैंक खातों, नकद लेन-देन, निवेश, ऋण, प्रॉपर्टी खरीद-बिक्री, कैपिटल गेन और कृषि आय की पूरी जानकारी नहीं देते। वहीं, सीमित जानकारी के आधार पर जल्दबाजी में तैयार किया गया रिटर्न भविष्य में मुश्किलें खड़ी कर सकता है। Read More






























