सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सीबीआई और गृह मंत्रालय की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए। अदालत ने कहा कि जब फोन टैपिंग का मूल आदेश 28 जून 2025 को जारी हुआ था, तो 1 जून 2025 से बैकडेट में उसकी मंजूरी कैसे दी जा सकती है। कोर्ट ने पाया कि आदेश में कहीं भी सार्वजनिक आपातस्थिति या जनसुरक्षा जैसी कानूनी आवश्यकताओं का उल्लेख नहीं था, जबकि फोन टैपिंग जैसे कदम के लिए यह अनिवार्य है। Read More































