RAIPUR. छत्तीसगढ़ सरकार गरीब महिलाओं के लिए अनोखी पहल कर रही है। इसके तहत स्व-सहायता समूह की महिलाओं को हाइजेनिक सेनेटरी पैड तैयार करने की जिम्मेदारी दी जाएगी। महिलाओं को पैड बनाने की ट्रेनिंग स्मार्ट सिटी की तरफ से दी जाएगी। इसके लिए दिल्ली की ई-केयर नामक संस्था को चुना गया है।
इसके जरिये बनने वाले सैनेटरी नैपकीन रीयूजेबल होंगे। यानी उन्हें धोकर बार-बार इस्तेमाल किया जा सकेगा। ये नैपकीन दो सालों तक चलेंगे। यह जानकारी रायपुर नगर निगम आयुक्त मयंक चतुर्वेदी ने दी है। उन्होंने कहा कि प्रयोग के तौर पर ई-केयर संस्था राजधानी रायपुर में 61 लाख रुपए की लागत से बनने वाले 36,000 किट महिलाओं को बांटेगी।
हर किट में तीन सैनेटरी पैड होंगे। इसकी वजह से निर्धन और गरीब महिलाओं को बार-बार पैड नहीं खरीदने होंगे। स्मार्ट सिटी ने इसके लिए तैयारी पूरी कर ली है। विभिन्न क्षेत्रों में काम करने वाली स्व-सहायता महिलाओं को दिल्ली की संस्था निशुल्क प्रशिक्षण देगी। इसके लिए 5 प्रोजेक्ट मैनेजर का चैनल होगा। यह करीब 150 मास्टर टेलर तैयार करेंगे, जो 200 महिलाओं को प्रशिक्षित करेंगे। ये महिलाएं निजी स्वास्थ्य क्षेत्र में स्वयं आत्मनिर्भर बना सकती हैं।
डिटर्जेंट पाउडर से धोना होगा
एक बार उपयोग करने के बाद सैनेटरी पैड को डिटर्जेंट पाउडर में आधे घंटे में भिगोना पड़ेगा। इसे धोने के बाद आधे घंटे धूप में सुखाने के बाद यह दोबारा इस्तेमाल के लिए तैयार हो जाएगा। इसे साफ करने के लिए ब्रश नहीं लगाना होगा। हालांकि, इसके सूखने के बाद इसमें एक-दो बूंद नींबू का रस या फिर डेटॉल की बूंदे डाली जा सकती हैं।
ऐसा होने पर आर्थिक तंगी की वजह से सैनेटरी पैड की जगह पारंपररिक तरीकों का इस्तेमाल करने वाली महिलाओं को बड़ी राहत मिलेगी। उनको होने वाले संक्रमण और अन्य बीमारियों का खतरा कम किया जा सकेगा। बताते चलें कि राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण की रिपोर्ट बताती है कि राज्य में 15 से 24 वर्ष की 68.6 प्रतिशत लड़कियां अभी भी पुराने कपड़ों का उपयोग करती हैं।





































