MUNGELI NEWS. छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जो पूरे प्रदेश के किसानों की चिंता बढ़ाने के लिए काफी है। ‘धान का कटोरा’ कहे जाने वाले इस राज्य में यदि किसान की मेहनत पर खराब बीजों का ग्रहण लग जाए, तो उसकी भरपाई कौन करेगा? मुंगेली के ग्राम मोतीमपुर (अमरटापू) में सामने आए धान बीज विवाद ने अब एक नया मोड़ ले लिया है। इस गंभीर प्रकरण में बीज कंपनी और किसानों के बीच 80 हजार रुपये की क्षतिपूर्ति का लिखित समझौता हो चुका है, लेकिन इसके साथ ही कृषि विभाग की जवाबदेही पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।

क्या था पूरा मामला?
ग्राम मोतीमपुर के किसान प्रेमचंद बघेल और संदीप बघेल ने मुंगेली स्थित ‘पंजाब एजेंसी’ से ‘चमक’ कंपनी का धान बीज खरीदा था। किसानों का आरोप है कि इस बीज की गुणवत्ता बेहद खराब थी, जिसके कारण उनकी लगभग दो एकड़ की फसल पूरी तरह प्रभावित हो गई। खेत में धान के साथ-साथ ‘करगा’ (जंगली धान) की गंभीर समस्या सामने आ गई।

दिन-रात मेहनत कर, कर्ज लेकर और अपनी उम्मीदों को फसल से जोड़ने वाले किसानों के लिए यह किसी बड़े झटके से कम नहीं था। न्याय पाने के लिए किसानों ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 पर शिकायत दर्ज कराई और मुंगेली कलेक्टर के जनदर्शन में भी गुहार लगाई थी।

बीज कंपनी और किसानों के बीच हुआ लिखित समझौता
मामले की गंभीरता को देखते हुए ‘तीरंदाज न्यूज़’ ने इसे लगातार प्रमुखता से उठाया। इसके बाद एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया:
प्रभावित रकबा: लगभग 2 एकड़ धान की फसल।
बीज की किस्म व लॉट नंबर: चमक SS-403 (लॉट नंबर CL-4561-AK26)।
जिम्मेदार कंपनी: UACI SEEDS & BIOTECH PVT. LTD.
समझौता राशि: कंपनी द्वारा किसानों को कुल 80 हजार रुपये क्षतिपूर्ति देने की लिखित सहमति।
मुआवजे के बाद भी क्यों सुलग रहे हैं सवाल?
भले ही पीड़ित किसानों को 80 हजार रुपये का मुआवजा मिल गया हो, लेकिन यह समझौता कई बड़े और अनछुए सवाल छोड़ गया है:
क्या बीज की गुणवत्ता में कोई तकनीकी गड़बड़ी या मिलावट थी?
क्या किसानों को वास्तव में वही किस्म मिली थी, जिसका वादा किया गया था?
क्या केवल मुआवजा देकर इस पूरे प्रकरण को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?
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छत्तीसगढ़ शासन और कृषि विभाग से 5 तीखे सवाल
अब प्रदेश भर की निगाहें शासन और कृषि विभाग पर टिकी हैं। जनता और किसान निम्नलिखित पांच बड़े सवालों के जवाब मांग रहे हैं:
लैब टेस्ट: क्या कृषि विभाग विवादित चमक SS-403 बीज (लॉट नंबर CL-4561-AK26) की प्रयोगशाला (Laboratory) जांच कराएगा?
कंपनी पर कार्रवाई: यदि जांच में बीज की गुणवत्ता या मिलावट प्रमाणित होती है, तो संबंधित बीज कंपनी के खिलाफ क्या दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी?
एजेंसी की भूमिका: किसानों को यह बीज उपलब्ध कराने वाली ‘पंजाब एजेंसी’ की भूमिका और जवाबदेही की जांच कौन करेगा?
व्यापक निगरानी: क्या प्रदेश में इसी कंपनी के अन्य बीज लॉट और उनकी आपूर्ति की भी उच्चस्तरीय जांच होगी ताकि अन्य किसानों की फसलें सुरक्षित रह सकें?
सार्वजनिक रिपोर्ट: क्या कृषि विभाग इस मामले में अब तक हुई जांच, उसके निष्कर्ष और दोषियों पर की गई कार्रवाई की पूरी रिपोर्ट सार्वजनिक करेगा?
न्याय की असली कसौटी क्या है?
छत्तीसगढ़ का किसान अपनी फसल को केवल आमदनी नहीं, बल्कि अपने परिवार की उम्मीद मानता है। किसानों को मुआवजा मिलना राहत की बात जरूर है, लेकिन दोषियों पर सख्त कार्रवाई होना ही न्याय की असली कसौटी है।
यदि सिर्फ दो एकड़ फसल के नुकसान पर 80 हजार रुपये का समझौता हो रहा है, तो ऐसी कंपनियों की कार्यप्रणाली पर लगाम कसना बेहद जरूरी है। किसान की मेहनत कोई प्रयोगशाला नहीं है, जिस पर कंपनियां प्रयोग करती रहें। अब देखना यह होगा कि छत्तीसगढ़ शासन इस मामले में केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित रहता है या फिर किसानों के पक्ष में कोई ठोस और नजीर पेश करने वाला कदम उठाता है।






































