RAIPUR NEWS. छत्तीसगढ़ में पर्यटन को रोजगार और स्वरोजगार का बड़ा माध्यम बनाने की तैयारी है। मुख्यमंत्री पर्यटन विकास मिशन के तहत युवाओं को पर्यटन उद्यमी बनाने, महिलाओं के स्व-सहायता समूहों को पर्यटन गतिविधियों से जोड़ने और प्रमुख पर्यटन स्थलों पर सुविधाएं बढ़ाने की योजना तैयार की गई है। इसके अंतर्गत 1,000 नए पर्यटन उद्यमी तैयार करने, 250 महिला स्व-सहायता समूहों को जोड़ने और 12 हजार अतिरिक्त कमरों की आवास क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मंत्रालय में पर्यटन विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान कहा कि पर्यटन का लाभ स्थानीय युवाओं, महिलाओं, हस्तशिल्पियों, कलाकारों और छोटे कारोबारियों तक पहुंचना चाहिए। सरकार पर्यटन को स्थानीय अर्थव्यवस्था और क्षेत्रीय विकास से जोड़ने की दिशा में काम कर रही है।

मुख्यमंत्री पर्यटन विकास मिशन के तहत पर्यटन विकास के लिए 500 करोड़ रुपये की मूल मिशन निधि प्रस्तावित है। इसके अतिरिक्त सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP), कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR), केंद्र सरकार की योजनाओं और विभिन्न विभागों के समन्वय से 1,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जुटाने की कार्ययोजना बनाई गई है। निजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए 10 से 20 सार्वजनिक-निजी भागीदारी परियोजनाएं विकसित करने का प्रस्ताव है। इनके माध्यम से कम से कम 1,000 करोड़ रुपये की निजी पूंजी आकर्षित करने का लक्ष्य रखा गया है।

मिशन के तहत पर्यटन से जुड़े अलग-अलग कामों में स्थानीय लोगों की भागीदारी बढ़ाने की योजना है। इसके लिए प्रशिक्षण और उद्यमिता को बढ़ावा दिया जाएगा।
1,000 पर्यटन उद्यमी: नए पर्यटन कारोबार शुरू करने के लिए लोगों को प्रोत्साहित करने का लक्ष्य।
250 महिला स्व-सहायता समूह: पर्यटन आधारित गतिविधियों से जोड़ने की योजना।
600 आतिथ्य एवं पर्यटक सहायता कर्मी: पर्यटकों की सेवा और आतिथ्य से जुड़े कार्यों के लिए प्रशिक्षण का लक्ष्य।
500 टूर गाइड और फ्रंटलाइन कर्मी: पर्यटकों को मार्गदर्शन और सहायता देने के लिए प्रशिक्षित करने की योजना।
होमस्टे, स्थानीय खानपान, हस्तशिल्प, लोककला, टूर गाइड, परिवहन और पर्यटक सहायता जैसी गतिविधियों से रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर विकसित करने पर जोर दिया जाएगा।

चित्रकोट, मैनपाट और सिरपुर समेत प्रमुख स्थल संवरेंगे
पर्यटन विकास मिशन के पहले चरण में पांच प्रमुख पर्यटन स्थलों को विकसित करने की योजना है।
चित्रकोट जलप्रपात: पर्यटकों के लिए जरूरी सुविधाओं का विस्तार।
मैनपाट: प्राकृतिक पर्यटन और पर्यटक सुविधाओं को बढ़ावा।
सिरपुर: ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक विरासत से जुड़े पर्यटन का विकास।
हसदेव बांगो जलाशय: पर्यटन गतिविधियों और सुविधाओं का विस्तार।
राजिम: धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा।
इसके अलावा मायाली-बगीचा, चंपारण, सतरेंगा, तीरथगढ़, देवरानी-जेठानी, कबीर चबूतरा, केंदई, महामाया और चिल्फी घाटी जैसे स्थलों में भी सुविधाएं विकसित करने की योजना है। इन स्थानों पर सड़क संपर्क, पेयजल, स्वच्छ शौचालय, पार्किंग, पर्यटक सहायता केंद्र, प्राथमिक चिकित्सा और सुरक्षा जैसी सुविधाओं को प्राथमिकता दी जाएगी।

पर्यटकों की संख्या दोगुनी करने का लक्ष्य
सरकार ने प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों की संख्या दोगुनी करने का लक्ष्य रखा है। इसके साथ ही पर्यटकों के औसत प्रवास की अवधि बढ़ाकर दो दिन करने की दिशा में काम किया जाएगा। पर्यटकों के ठहरने के लिए होटल, रिसॉर्ट और होमस्टे जैसी सुविधाओं में 12 हजार अतिरिक्त कमरों की क्षमता विकसित करने की कार्ययोजना है। इससे आवास, खानपान, परिवहन और अन्य पर्यटन सेवाओं से जुड़े कारोबार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
चार बड़े और 15 मिनी पर्यटन सर्किट बनेंगे
छत्तीसगढ़ के प्राकृतिक, धार्मिक, ऐतिहासिक और जनजातीय पर्यटन स्थलों को आपस में जोड़ने के लिए चार प्रमुख और 15 मिनी पर्यटन सर्किट विकसित करने की योजना है। इसके अलावा प्रमुख पर्यटन मार्गों पर लगभग 15 से 20 वे-साइड सुविधाएं और करीब 500 पर्यटन संकेतक लगाए जाने का प्रस्ताव है। इससे पर्यटकों को रास्तों, पर्यटन स्थलों और जरूरी सुविधाओं की जानकारी प्राप्त करने में आसानी होगी। पर्यटकों की यात्रा आसान बनाने के लिए बहुभाषी पर्यटन वेबसाइट, मोबाइल एप, डिजिटल बुकिंग, ऑनलाइन भुगतान और रियल टाइम नेविगेशन जैसी सुविधाएं विकसित करने की योजना है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित पर्यटन सूचना प्रणाली के माध्यम से भी पर्यटकों को जानकारी उपलब्ध कराने का प्रस्ताव है।





































