RAIPUR NEWS छत्तीसगढ़ में जमीन के इस्तेमाल से जुड़े करीब चार दशक पुराने नियमों में बड़ा बदलाव किया गया है। आवास एवं पर्यावरण विभाग ने छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियम, 1984 में संशोधन कर दिया है। दावा-आपत्ति की प्रक्रिया पूरी होने के बाद संशोधित नियम 7 अक्टूबर 2026 को राजपत्र में प्रकाशित किए गए।

नए नियमों में सबसे बड़ा बदलाव जमीन के अलग-अलग उपयोग की श्रेणियों में गतिविधियों की अनुमति को लेकर किया गया है। अब किसी भूमि उपयोग श्रेणी में हर गतिविधि के लिए अलग से अनुमति वाली सूची पर निर्भरता कम होगी। जो गतिविधि संबंधित भूमि उपयोग श्रेणी की प्रतिबंधित गतिविधियों की सूची में नहीं है, उसे सामान्य तौर पर अनुमति योग्य माना जाएगा।

इस बदलाव से बदलती जरूरतों के मुताबिक जमीन के इस्तेमाल का दायरा बढ़ सकता है। हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि किसी भी जमीन पर कोई भी गतिविधि बिना अन्य कानूनी अनुमति के शुरू की जा सकेगी। भवन निर्माण, पर्यावरण, सुरक्षा और अन्य लागू नियमों का पालन करना जरूरी रहेगा।
क्या है नया नियम?
राजपत्र में नियम 38 के उप-नियम (1) में संशोधन किया गया है। इसके तहत अलग-अलग भूमि उपयोग श्रेणियों में सभी गतिविधियों को अनुमति योग्य माना जाएगा, बशर्ते वे उस श्रेणी के लिए निर्धारित प्रतिबंधित गतिविधियों की सूची में शामिल न हों।

यानी पहले जहां किसी गतिविधि की अनुमति के लिए उसका नाम निर्धारित सूची में होना अहम था, वहीं अब व्यवस्था का आधार बदलकर ‘क्या प्रतिबंधित है’ पर कर दिया गया है।
7 तरह की जमीन के लिए अलग-अलग प्रतिबंध
नए प्रावधानों में जमीन के इस्तेमाल को सात प्रमुख श्रेणियों में बांटा गया है। इनमें शामिल हैं—
आवासीय
वाणिज्यिक
औद्योगिक
सार्वजनिक एवं अर्ध-सार्वजनिक
परिवहन
आमोद-प्रमोद
कृषि
इन सभी श्रेणियों के लिए अलग-अलग प्रतिबंधित गतिविधियों की सूची निर्धारित की गई है।
आवासीय जमीन पर इन गतिविधियों पर रोक
आवासीय क्षेत्र में हरित, नारंगी और लाल श्रेणी के उद्योगों के अलावा गैस से जुड़े गोदाम, कबाड़खाने, संक्रामक रोगों के अस्पताल, जेल, बड़े परिवहन टर्मिनल और थोक व्यापार जैसी गतिविधियों पर रोक रहेगी।
इसके अलावा तेल डिपो, पेट्रोलियम एवं ज्वलनशील पदार्थों का भंडारण, गैस गोदाम, पशु एवं मछली पालन, डेयरी, कचरा पालन और खनन जैसी गतिविधियां भी प्रतिबंधित रहेंगी।
वाणिज्यिक जमीन पर क्या नहीं होगा?
वाणिज्यिक भूमि में नारंगी, लाल और नीली श्रेणी के उद्योगों को प्रतिबंधित किया गया है। इसके साथ ही खतरनाक या जहरीले रसायनों का भंडारण, विस्फोटक पदार्थ रखना, पशु एवं मछली पालन, डेयरी और कचरा पालन जैसी गतिविधियों पर भी रोक रहेगी।
वध से जुड़ी गतिविधियां, कब्रिस्तान और खनन भी इस श्रेणी में प्रतिबंधित गतिविधियों में शामिल हैं।
औद्योगिक जमीन पर भी कई गतिविधियां प्रतिबंधित
औद्योगिक क्षेत्र में सामान्य आवासीय बस्तियों के विकास पर रोक रहेगी। हालांकि, निर्धारित प्रावधानों के तहत विशेष आवासीय टाउनशिप का प्रावधान अलग हो सकता है।
औद्योगिक भूमि में स्कूल, संक्रामक रोगों के अस्पताल, जेल, बड़े परिवहन टर्मिनल, थोक व्यापार, तेल डिपो, पेट्रोलियम एवं ज्वलनशील पदार्थों का भंडारण, गैस गोदाम, पशुपालन, डेयरी और कचरा पालन जैसी गतिविधियां भी प्रतिबंधित रहेंगी।
कृषि भूमि को लेकर भी बड़ा बदलाव
कृषि भूमि के उपयोग को लेकर भी नए नियमों में स्पष्ट प्रतिबंध तय किए गए हैं। कृषि भूमि पर वाणिज्यिक परिसर और कुछ बड़ी परियोजनाओं के निर्माण की अनुमति नहीं होगी।
इसी तरह उच्च घनत्व वाली आवासीय योजनाओं और बड़े मॉल जैसी गतिविधियों पर भी रोक रहेगी। यानी कृषि भूमि को केवल सामान्य अनुमति व्यवस्था के तहत किसी भी गैर-कृषि गतिविधि के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा।
आम लोगों पर क्या पड़ेगा असर?
नए नियमों का सबसे बड़ा असर जमीन के इस्तेमाल की प्रक्रिया पर पड़ सकता है। अब किसी नई गतिविधि के लिए पहले से तय ‘अनुमति वाली गतिविधियों’ की लंबी सूची में उसका नाम तलाशने की जरूरत कम होगी।
अगर कोई गतिविधि संबंधित भूमि उपयोग श्रेणी की प्रतिबंधित सूची में शामिल नहीं है, तो उसे सामान्य तौर पर अनुमति योग्य माना जाएगा। इससे नई तरह के कारोबार, सेवाओं और बदलती शहरी जरूरतों के लिए जमीन के इस्तेमाल में अधिक लचीलापन आ सकता है।
हालांकि, लैंड यूज की अनुमति मिलने का मतलब यह नहीं है कि बाकी सभी कानूनी मंजूरियां स्वतः मिल गईं। भवन निर्माण अनुमति, पर्यावरणीय स्वीकृति, अग्नि सुरक्षा, प्रदूषण नियंत्रण और अन्य संबंधित नियम जहां लागू होंगे, वहां उनका पालन करना जरूरी रहेगा।
चार दशक बाद बदली जमीन के इस्तेमाल की व्यवस्था
छत्तीसगढ़ में 1984 में बनाए गए भूमि विकास नियमों में यह बदलाव लंबे समय बाद जमीन के इस्तेमाल की व्यवस्था को नए दौर की जरूरतों के अनुरूप ढालने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। आवासीय, वाणिज्यिक, औद्योगिक, कृषि, परिवहन, मनोरंजन और सार्वजनिक-अर्धसार्वजनिक भूमि उपयोग—सभी प्रमुख श्रेणियों में प्रतिबंधित गतिविधियों को स्पष्ट किया गया है।
अब आने वाले समय में इन संशोधनों का वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि स्थानीय स्तर पर भूमि उपयोग, भवन निर्माण और दूसरी जरूरी अनुमतियों की प्रक्रिया किस तरह लागू होती है।





































