RAIPUR NEWS. छत्तीसगढ़ में गांवों की संस्कृति, परंपरा और प्राकृतिक खूबसूरती को पर्यटन से जोड़ने वाले लोगों और संस्थाओं को अब राज्य स्तर पर सम्मान मिलेगा। पर्यटन विभाग ने ग्रामीण पर्यटन के क्षेत्र में उत्कृष्ट काम करने वाले व्यक्ति या संस्था के लिए ‘चेन्दरू राज्य ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार’ शुरू किया है। चयनित विजेता को एक लाख रुपए की नकद राशि और प्रशस्ति पत्र दिया जाएगा। राज्य सरकार ने इसके लिए ‘चेन्दरू, राज्य ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार नियम, 2025’ लागू किए हैं। पुरस्कार का उद्देश्य ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ स्थानीय रोजगार, आजीविका, संस्कृति और प्राकृतिक धरोहर के संरक्षण को प्रोत्साहित करना है।

ग्रामीण पर्यटन के क्षेत्र में होमस्टे, स्थानीय व्यंजन, हस्तशिल्प, लोककला, लोकसंस्कृति, प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण और सामुदायिक पर्यटन के लिए काम करने वाले व्यक्ति या संस्थाएं पुरस्कार के लिए दावेदारी कर सकेंगी। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ के गांवों की संस्कृति, परंपराएं और प्राकृतिक संसाधन पर्यटन की बड़ी ताकत हैं। सरकार का प्रयास है कि पर्यटन का लाभ केवल प्रमुख पर्यटन स्थलों तक सीमित न रहे, बल्कि ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों तक पहुंचे।

उनके मुताबिक ग्रामीण पर्यटन के जरिए स्थानीय युवाओं, महिलाओं, स्व-सहायता समूहों, कारीगरों और ग्रामीण उद्यमियों के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाए जा सकते हैं। इस पुरस्कार का नाम ‘चेन्दरू’ रखा गया है। यह नाम बस्तर और वहां के प्राकृतिक जीवन से जुड़ी पहचान को सामने लाता है। इसी नाम से शुरू किया गया पुरस्कार ग्रामीण पर्यटन के क्षेत्र में जमीनी स्तर पर काम करने वाले लोगों और संस्थाओं को राज्य स्तर पर पहचान देगा। पुरस्कार के तहत चयनित व्यक्ति या संस्था को एक लाख रुपए और प्रशस्ति पत्र दिया जाएगा। नियमों के अनुसार किसी व्यक्ति को यह पुरस्कार उसके जीवनकाल में केवल एक बार दिया जा सकेगा।

पुरस्कार के लिए प्राप्त प्रविष्टियों का मूल्यांकन छह सदस्यीय निर्णायक मंडल करेगा। इसकी अध्यक्षता छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक करेंगे। मूल्यांकन में ग्रामीण पर्यटन के क्षेत्र में किए गए काम, उसके प्रभाव, स्थानीय समुदाय की भागीदारी, रोजगार सृजन तथा संस्कृति और प्राकृतिक धरोहर के संरक्षण जैसे पहलुओं को महत्व दिया जाएगा। छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड प्रमुख समाचार पत्रों के माध्यम से पुरस्कार के लिए प्रविष्टियां आमंत्रित करेगा। आवेदकों को अपनी प्रोफाइल, फोटो, स्थानीय निवासी प्रमाण-पत्र, आधार कार्ड और ग्रामीण पर्यटन के क्षेत्र में किए गए काम व उपलब्धियों से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे।

गांवों तक पहुंचेगा पर्यटन का आर्थिक लाभ
चयनित विजेता या संस्था के प्रतिनिधि को राज्योत्सव के अवसर पर सम्मानित किया जाएगा। इसके साथ ही विजेता के काम, नवाचार और उपलब्धियों पर आधारित सचित्र स्मारिका भी जारी की जाएगी। छत्तीसगढ़ में बस्तर और सरगुजा की जनजातीय संस्कृति से लेकर स्थानीय खान-पान, हस्तशिल्प, लोककला, मेले-पर्व और प्राकृतिक स्थलों तक ग्रामीण पर्यटन की कई संभावनाएं हैं। होमस्टे और सामुदायिक पर्यटन के जरिए पर्यटकों को स्थानीय जीवनशैली का अनुभव कराने के साथ पर्यटन से होने वाली आय को गांवों तक पहुंचाने की कोशिश की जा सकती है।



































