RAIPUR NEWS. छत्तीसगढ़ के जल, जंगल, जमीन, संस्कृति, परंपरा और जनहित से जुड़े मुद्दों को लेकर सक्रिय छत्तीसगढ़ स्वाभिमान संस्थान अब संगठनात्मक विस्तार की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। संस्थान की ओर से प्रदेश स्तर पर नए प्रकोष्ठों के गठन के साथ समाजसेवा से जुड़े लोगों को संगठन से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू की गई है।

संस्थान के प्रदेश अध्यक्ष एवं छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण आंदोलन से जुड़े डॉ. उदय भान सिंह चौहान के नेतृत्व में 15 मई 2001 को छत्तीसगढ़ की अस्मिता, संस्कृति, परंपरा और जनहितों को मजबूती देने के उद्देश्य से संस्थान का गठन किया गया था। संस्थान का दावा है कि वह आमजन की समस्याओं और मांगों को शासन-प्रशासन तक पहुंचाने के लिए सेतु के रूप में कार्य करता है।

कल्याण प्रकोष्ठ के गठन की पहल
संस्थान के नियमों और उद्देश्यों के अनुरूप संगठन को आमजन तक पहुंचाने के लिए प्रदेश अध्यक्ष कल्याण प्रकोष्ठ का गठन किया जा रहा है। इसके संचालन, संगठनात्मक विस्तार और समाज के हितों एवं अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर प्रभावी कार्य करने के लिए प्रदेश स्तर पर पदाधिकारियों की नियुक्ति की जाएगी।
संस्थान की ओर से कहा गया है कि नियुक्त किए जाने वाले पदाधिकारियों से संगठन के उद्देश्यों और विचारधारा को जन-जन तक पहुंचाने के साथ समाजहित में सक्रिय भूमिका निभाने की अपेक्षा है।

गणेश चतुर्थी से नवरात्रि तक चलेगा नियुक्तियों का सिलसिला
संगठन के विस्तार के तहत विभिन्न प्रकोष्ठों में विशेषज्ञता, रुचि और योग्यता के आधार पर समाजसेवा में योगदान देने के इच्छुक लोगों को जिम्मेदारियां देने की योजना है। इसके लिए इच्छुक लोगों से जीवन परिचय और फोटो भेजने की अपील की गई है, ताकि उनकी योग्यता और रुचि के अनुरूप संगठन में दायित्व सौंपा जा सके।

संस्थान के अनुसार प्रदेश, संभाग, जिला, तहसील और ब्लॉक स्तर पर भी पदाधिकारियों के मनोनयन की प्रक्रिया शुरू की गई है। यह नियुक्ति प्रक्रिया गणेश चतुर्थी से शुरू होकर नवरात्रि तक जारी रहने की बात कही गई है।
संस्थान ने समाजसेवा, जनहित और छत्तीसगढ़ के मुद्दों के लिए स्वप्रेरणा से काम करने के इच्छुक लोगों से संगठन से जुड़ने का आह्वान किया है।



































