RAIPUR NEWS. छत्तीसगढ़ में विज्ञान, तकनीक और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में बड़े बदलाव की तैयारी है। भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) बेंगलुरु के सहयोग से प्रदेश में तीन महत्वाकांक्षी परियोजनाओं पर काम करने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। इनमें विश्वस्तरीय मटेरियल कैरेक्टराइजेशन एवं टेस्टिंग सेंटर, विज्ञान और गणित के उत्कृष्ट शिक्षक तैयार करने के लिए चार वर्षीय बीएससी-बीएड संस्थान तथा आधुनिक चिकित्सा अनुसंधान एवं स्वास्थ्य तकनीक में सहयोग शामिल है। इन परियोजनाओं को लेकर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 4 नवंबर को IISc बेंगलुरु के निदेशक प्रोफेसर जी. रंगराजन और वरिष्ठ वैज्ञानिकों के साथ उच्चस्तरीय बैठक की। बैठक में प्रस्तावित परियोजनाओं की रूपरेखा, वैज्ञानिक अधोसंरचना और क्रियान्वयन की संभावनाओं पर चर्चा हुई। सरकार का जोर इन योजनाओं के जरिए प्रदेश को केवल खनिज और औद्योगिक उत्पादन के लिए ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिक अनुसंधान, तकनीकी नवाचार और आधुनिक चिकित्सा के क्षेत्र में भी पहचान दिलाने पर है।

खास बात यह है कि इन पहलों का लाभ बस्तर, सरगुजा सहित ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों के युवाओं तक पहुंचाने की योजना पर भी जोर दिया गया है। बैठक में जिन तीन परियोजनाओं पर चर्चा हुई, उनमें पहली विश्वस्तरीय मटेरियल कैरेक्टराइजेशन एंड टेस्टिंग फैसिलिटी की स्थापना है। दूसरा प्रस्ताव विज्ञान एवं गणित के बेहतर शिक्षक तैयार करने के लिए चार वर्षीय एकीकृत बीएससी-बीएड संस्थान का है। तीसरी पहल चिकित्सा अनुसंधान, डिजिटल हेल्थ और आधुनिक स्वास्थ्य तकनीकों के क्षेत्र में IISc की विशेषज्ञता का लाभ छत्तीसगढ़ को दिलाने से जुड़ी है। इन परियोजनाओं के माध्यम से प्रदेश में उच्चस्तरीय अनुसंधान सुविधाएं विकसित करने, विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण देने और उद्योगों को वैज्ञानिक परीक्षण की सुविधाएं उपलब्ध कराने की संभावनाएं हैं। फिलहाल ये प्रस्तावित परियोजनाएं हैं। मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को इनकी तकनीकी, वित्तीय और संस्थागत व्यवहार्यता का परीक्षण कर ठोस कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं।

प्रस्तावित मटेरियल कैरेक्टराइजेशन एवं टेस्टिंग सेंटर छत्तीसगढ़ के खनिज, इस्पात, धातु और ऊर्जा आधारित उद्योगों के लिए उपयोगी हो सकता है। इस केंद्र में अत्याधुनिक माइक्रोस्कोपी, एक्स-रे आधारित विश्लेषण, उच्च तापमान पर पदार्थों का परीक्षण, नैनो टेक्नोलॉजी और इलेक्ट्रॉनिक एवं चुंबकीय पदार्थों के अध्ययन जैसी सुविधाएं विकसित करने की परिकल्पना है। इसके अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित वैज्ञानिक विश्लेषण की सुविधा भी प्रस्तावित है। इससे धातुओं और मिश्रधातुओं की गुणवत्ता जांचने, नए औद्योगिक पदार्थों के गुणों का अध्ययन करने और विनिर्माण तकनीकों को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। इस केंद्र में एक समय में करीब 600 शोधार्थियों और विद्यार्थियों के आवासीय प्रशिक्षण की क्षमता विकसित करने का प्रस्ताव है। इसके माध्यम से तीन वर्षों में लगभग 1800 विद्यार्थियों को उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीकी प्रशिक्षण देने का लक्ष्य रखा गया है।

दूसरी परियोजना स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने से जुड़ी है। इसके तहत IISc के अकादमिक मार्गदर्शन में चार वर्षीय एकीकृत बीएससी-बीएड पाठ्यक्रम संचालित करने वाले विशेष संस्थान की स्थापना का प्रस्ताव है। इस संस्थान में भौतिकी, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान और गणित के साथ आधुनिक शिक्षण पद्धतियों, वैज्ञानिक अनुसंधान, संचार कौशल और समस्या समाधान जैसे विषयों पर प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रस्तावित संस्थान में 14 आधुनिक शिक्षण प्रयोगशालाएं और 600 विद्यार्थियों की आवासीय क्षमता विकसित करने की योजना है। इसके अलावा समृद्ध पुस्तकालय, डिजिटल शिक्षण सुविधाएं, आधुनिक व्याख्यान कक्ष और खेल सुविधाएं भी होंगी। यहां 25 पूर्णकालिक शिक्षकों की व्यवस्था प्रस्तावित है।

मेडिकल रिसर्च और डिजिटल हेल्थ में भी मिलेगा सहयोग
तीसरी परियोजना आधुनिक चिकित्सा अनुसंधान और स्वास्थ्य तकनीक से संबंधित है। इसमें किफायती चिकित्सा जांच तकनीकों, आधुनिक चिकित्सा उपकरणों, डिजिटल हेल्थ और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित स्वास्थ्य सेवाओं के विकास पर जोर दिया गया है। इसके लिए शुरुआत में पूर्ण मेडिकल स्कूल स्थापित करने के बजाय हब एंड नेटवर्क मॉडल अपनाने की संभावना पर चर्चा हुई। इसके तहत IISc को छत्तीसगढ़ के अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और औद्योगिक संस्थानों से जोड़कर संयुक्त अनुसंधान को बढ़ावा दिया जा सकता है।इस मॉडल में संयुक्त अनुसंधान प्रयोगशालाएं, चिकित्सा तकनीकों के परीक्षण एवं सत्यापन केंद्र, फेलोशिप और विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम विकसित करने की संभावनाएं हैं। कैंसर, हृदय रोग, न्यूरोलॉजी, अंग प्रत्यारोपण और रोबोटिक सर्जरी जैसे क्षेत्रों में IISc मेडिकल स्कूल के अनुभव का लाभ लेने पर भी चर्चा हुई।
बस्तर-सरगुजा के युवाओं को प्राथमिकता देने पर जोर
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बैठक में विशेष रूप से कहा कि वैज्ञानिक शिक्षा और तकनीकी प्रशिक्षण का लाभ केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। बस्तर, सरगुजा और अन्य दूरस्थ क्षेत्रों में भी प्रतिभाशाली युवा हैं। उन्हें आधुनिक प्रयोगशालाओं और प्रतिष्ठित वैज्ञानिक संस्थानों से जुड़ने के अवसर मिलने चाहिए। इसके लिए स्नातक और स्नातकोत्तर विद्यार्थियों को ग्रीष्मकालीन एवं शीतकालीन अनुसंधान इंटर्नशिप, वैज्ञानिक मार्गदर्शन और आधुनिक प्रयोगशाला तकनीकों का प्रशिक्षण देने की संभावनाओं पर चर्चा हुई। सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और जैव प्रौद्योगिकी जैसे उभरते क्षेत्रों में विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम भी प्रस्तावित हैं।
बिना बिजली पानी खींचने वाली तकनीक पर भी चर्चा
बैठक में बस्तर और सुकमा सहित दूरस्थ क्षेत्रों में जल संरक्षण के लिए आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल पर भी चर्चा हुई। IISc के वैज्ञानिकों ने बिजली के बिना पानी के प्रवाह की ऊर्जा से संचालित हाइड्रोलिक रैम और टरबाइन पंपों की जानकारी दी। ये तकनीकें उन वनांचलों में उपयोगी हो सकती हैं, जहां बिजली आधारित जलापूर्ति व्यवस्था संचालित करना कठिन होता है। इसके अलावा शोधित जल के पुनर्चक्रण, जलाशयों के पुनर्भरण और भूजल संवर्धन पर भी चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सभी प्रस्तावों का गंभीरता से परीक्षण कर समयबद्ध कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए हैं। इन तीन परियोजनाओं के साथ तकनीकी प्रशिक्षण और जल संरक्षण की पहल आगे बढ़ती है तो छत्तीसगढ़ में शिक्षा, उद्योग, अनुसंधान और स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में नए अवसर तैयार हो सकते हैं।





































