RAIPUR NEWS. छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में सुरक्षा बलों ने निर्णायक सफलता हासिल की है। हालांकि, इस संघर्ष में जवानों को भी बड़ी कीमत चुकानी पड़ी है। पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम के अनुसार, 1 सितंबर 2025 से 31 अगस्त 2026 के बीच छत्तीसगढ़ पुलिस के छह जवानों ने कर्तव्य निभाते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया, जबकि नक्सल विरोधी अभियानों में 84 नक्सली मारे गए। बुधवार को पुलिस स्मृति दिवस के अवसर पर राजधानी रायपुर के माना स्थित चौथी वाहिनी छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल परिसर में आयोजित परेड में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि जवानों के साहस, शौर्य और बलिदान से प्रदेश में शांति, सुरक्षा और विश्वास का नया वातावरण बना है। सरकार शहीद परिवारों के सम्मान, पुलिस बल के आधुनिकीकरण और बस्तर के विकास के लिए प्रतिबद्ध है।

पुलिस स्मृति दिवस पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कर्तव्य पथ पर प्राण न्योछावर करने वाले पुलिस अधिकारियों और जवानों को नमन किया। उन्होंने शहीद स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित कर वीर जवानों को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान शहीद पुलिसकर्मियों के परिजनों को शॉल, श्रीफल और स्मृति चिह्न भेंटकर सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस स्मृति दिवस केवल शहीदों को याद करने का अवसर नहीं है, बल्कि राष्ट्रसेवा, कर्तव्यनिष्ठा और नागरिकों की सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराने का दिन भी है। एक जवान जब देश की सुरक्षा के लिए अपने कर्तव्य पर तैनात रहता है, तब उसके पीछे उसके परिवार का त्याग, धैर्य और साहस भी जुड़ा होता है।

पुलिस स्मृति दिवस का इतिहास 21 अक्टूबर 1959 से जुड़ा है। उस दिन लद्दाख के हॉट स्प्रिंग्स क्षेत्र में भारत-तिब्बत सीमा के पास तैनात भारतीय पुलिस के जवानों ने चीनी सैनिकों का बहादुरी से सामना किया था। इस संघर्ष में 10 पुलिसकर्मी शहीद हुए थे। इन्हीं वीर जवानों की स्मृति में हर साल 21 अक्टूबर को पुलिस स्मृति दिवस मनाया जाता है। इस दिन देशभर में कर्तव्य निर्वहन के दौरान प्राण गंवाने वाले पुलिसकर्मियों और सुरक्षा बलों के जवानों को श्रद्धांजलि दी जाती है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पुलिस और सुरक्षा बलों के जवान कठिन परिस्थितियों में भी नागरिकों की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए तत्पर रहते हैं। उनका समर्पण समाज में शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ लंबा संघर्ष चला है। इस दौरान छत्तीसगढ़ पुलिस, जिला रिजर्व गार्ड (डीआरजी), बस्तर फाइटर्स और केंद्रीय सुरक्षा बलों के जवानों ने दुर्गम जंगलों, पहाड़ियों और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में अभियान चलाए। उन्होंने कहा कि जवानों के साहस और बलिदान से नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक सफलता मिली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से नक्सलवाद के उन्मूलन की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। मुख्यमंत्री के मुताबिक, बस्तर के जिन इलाकों में कभी हिंसा और भय का माहौल था, वहां अब शांति, सुरक्षा और विकास की गतिविधियां बढ़ रही हैं। उन्होंने इस बदलाव का श्रेय सुरक्षा बलों के समर्पण और बलिदान को दिया।

बस्तर में सड़क, बिजली, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा के साथ विकास पर भी जोर दिया जा रहा है। बस्तर के दूरस्थ गांवों तक सड़क, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और संचार जैसी बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि नियद नेल्लानार योजना, प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम जनमन) और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के माध्यम से दूरस्थ और वंचित जनजातीय क्षेत्रों में सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। मुख्यमंत्री के अनुसार, इन प्रयासों से शासन की योजनाओं को लोगों तक पहुंचाने और लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रति विश्वास मजबूत करने में मदद मिल रही है। अब चुनौती इन उपलब्धियों को स्थायी बनाते हुए विकास की गति को और तेज करने की है।
राजीव स्मृति वन की शहीद वाटिका में भी दी श्रद्धांजलि
पुलिस स्मृति दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय राजधानी के राजीव स्मृति वन स्थित शहीद वाटिका पहुंचे। यहां उन्होंने अमर जवान स्तंभ पर पुष्प अर्पित कर शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दी। मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने शहीद जवानों के नामों की पट्टिका पर पुष्प अर्पित कर उनके शौर्य और बलिदान को याद किया। इस अवसर पर विधायक मोतीलाल साहू, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक विवेकानंद सिन्हा सहित पुलिस और सुरक्षा बलों के वरिष्ठ अधिकारी तथा शहीद जवानों के परिजन उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने कहा कि अमर शहीदों का बलिदान छत्तीसगढ़ की स्मृतियों में सदैव जीवित रहेगा। उनका साहस और राष्ट्रसेवा की भावना आने वाली पीढ़ियों को भी देश और समाज के लिए समर्पित रहने की प्रेरणा देती रहेगी।





































