BILASPUR NEWS. छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में प्रेम प्रस्ताव ठुकराने के बाद 17 वर्षीय किशोरी से मारपीट और उसकी आत्महत्या से जुड़े मामले में अदालत ने आरोपी दीपक चौहान को दोषमुक्त कर दिया है। अपर सत्र न्यायाधीश नीरू सिंह की अदालत ने कहा कि किशोरी का मृत्युपूर्व बयान विश्वसनीय है, लेकिन आरोपी के खिलाफ आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरण यानी उकसाने का अपराध संदेह से परे साबित नहीं हो सका।
यह मामला वर्ष 2017 का है। अदालत ने स्पष्ट किया कि प्रेम प्रस्ताव और मारपीट की घटना सामने आने के बावजूद भारतीय दंड कानून के तहत आत्महत्या के लिए उकसाने के आवश्यक कानूनी तत्वों का साबित होना जरूरी है।
प्रेम प्रस्ताव ठुकराने पर मारपीट का आरोप
मामला 10 जून 2017 की रात करीब नौ बजे सीपत थाना क्षेत्र के कौड़िया गांव का है। अभियोजन के अनुसार, रिश्ते में भाई लगने वाला दीपक चौहान 17 वर्षीय अंजलि चौहान के घर पहुंचा और उसके सामने प्रेम प्रस्ताव रखा।
बताया गया कि अंजलि के विरोध करने और गाली देने पर दीपक ने उसके बाल पकड़कर मारपीट की। इसके बाद किशोरी ने कथित तौर पर खुद पर मिट्टी का तेल छिड़ककर चिमनी की आग से खुद को जला लिया। गंभीर रूप से झुलसने के बाद उसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 17 जून 2017 को सिम्स अस्पताल में उसकी मौत हो गई।
मृत्युपूर्व बयान पर अदालत ने क्या कहा?
मामले की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने मृत्युपूर्व बयान दर्ज करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। बचाव पक्ष का तर्क था कि बयान दर्ज करते समय कार्यपालिक मजिस्ट्रेट एवं तहसीलदार श्वेता यादव ने किशोरी की मानसिक स्थिति ठीक होने से संबंधित चिकित्सकीय प्रमाणपत्र नहीं लिया था। हालांकि, अदालत ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। न्यायालय ने कहा कि मजिस्ट्रेट ने यह सुनिश्चित किया था कि किशोरी होश में थी और बयान देने में सक्षम थी। इस आधार पर अदालत ने मृत्युपूर्व बयान को विश्वसनीय माना।
आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप साबित नहीं
अदालत ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के एम. अर्जुनन बनाम राज्य और उदय सिंह एवं अन्य बनाम हरियाणा राज्य मामलों में दिए गए निर्णयों का उल्लेख किया। न्यायालय के अनुसार, घटना के दौरान प्रेम प्रस्ताव रखने और मारपीट किए जाने की बात सामने आई, लेकिन इससे अपने आप यह साबित नहीं होता कि आरोपी ने किशोरी को आत्महत्या के लिए उकसाया था। आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरण के अपराध में आवश्यक कानूनी तत्वों और आरोपी के आशय को साबित करना जरूरी है। अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों को संदेह से परे साबित करने में सफल नहीं रहा। इसी आधार पर दीपक चौहान को दोषमुक्त कर दिया गया।
छह महीने तक प्रभावी रहेगा जमानत बंधपत्र
फैसले में अदालत ने आरोपी के जमानत बंधपत्र को निर्णय की तारीख से छह महीने तक प्रभावी रखने का निर्देश भी दिया। इस अवधि के दौरान लागू कानूनी प्रावधानों के अनुसार आवश्यक प्रक्रिया पूरी की जा सकेगी।





































