ETAWAH NEWS: उत्तर प्रदेश के इटावा में भ्रष्टाचार के खिलाफ विजिलेंस ने बड़ी कार्रवाई की है। स्वास्थ्य विभाग में तैनात डिप्टी CMO डॉ. श्रीनिवास यादव को 55 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया है। यह कार्रवाई बुधवार, 10 जून 2026 को मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय परिसर में की गई, जिससे पूरे स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया।
मामले की शुरुआत 4 जून 2026 को हुई थी, जब एक शिकायतकर्ता ने उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान, कानपुर सेक्टर में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि उसने अपनी पत्नी के नाम से “श्री जी अल्ट्रासाउंड क्लीनिक” खोलने के लिए आवेदन किया था। इस आवेदन की फाइल को आगे बढ़ाने और आवश्यक अनुमोदन देने के बदले डिप्टी CMO द्वारा 55 हजार रुपये की रिश्वत की मांग की जा रही थी।
शिकायत के बाद विजिलेंस टीम ने मामले का सत्यापन किया, जिसमें आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए। इसके बाद पुलिस अधीक्षक, उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान, कानपुर के निर्देश पर एक विशेष ट्रैप टीम का गठन किया गया और आरोपी अधिकारी को पकड़ने की योजना तैयार की गई।
तय रणनीति के अनुसार, बुधवार को शिकायतकर्ता ने आरोपी से संपर्क किया और रिश्वत देने के लिए मुलाकात तय की। जैसे ही डॉ. श्रीनिवास यादव ने 55 हजार रुपये की रकम स्वीकार की, पहले से तैयार विजिलेंस टीम ने मौके पर छापा मारकर उन्हें रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। टीम ने रिश्वत की पूरी रकम भी बरामद कर ली।
गिरफ्तारी के बाद मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। कर्मचारी और अधिकारी पूरे घटनाक्रम को लेकर चर्चा करते नजर आए। एक वरिष्ठ अधिकारी के इस तरह रिश्वत मामले में पकड़े जाने से स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
विजिलेंस विभाग ने आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। आगे की विधिक कार्रवाई पूरी होने के बाद आरोपी को न्यायालय में पेश किया जाएगा।
विजिलेंस ने दोहराया है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ उसकी कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। विभाग ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि यदि कोई सरकारी अधिकारी रिश्वत की मांग करता है तो उसकी शिकायत एंटी करप्शन हेल्पलाइन पर दर्ज कराई जाए।





































