NEW DELHI NEWS. पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच शांति को लेकर चली लंबी वार्ता आखिरकार बेनतीजा समाप्त हो गई। करीब 21 घंटे तक चली इस मैराथन बातचीत में सबसे बड़ा गतिरोध होर्मुज स्ट्रेट को खोलने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बना रहा। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने वार्ता के बाद साफ कहा कि अमेरिका बिना किसी समझौते के ही वापस लौट रहा है। उन्होंने कहा कि “यह स्थिति अमेरिका से ज्यादा ईरान के लिए नुकसानदायक है।

वेंस ने जोर देकर कहा कि किसी भी संभावित समझौते के लिए यह जरूरी है कि ईरान साफ तौर पर यह वादा करे कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा। उनके मुताबिक अमेरिका की शर्तें स्पष्ट थीं, लेकिन ईरान ने उन्हें स्वीकार नहीं किया। ईरान ने भी बातचीत विफल होने के लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया। ईरानी पक्ष का कहना है कि अमेरिकी शर्तें बेहद कठोर थीं, जिन पर सहमति बनना संभव नहीं था। इसी वजह से कोई रास्ता नहीं निकल पाया।

अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड CENTCOM ने जानकारी दी है कि समुद्री रास्तों को सुरक्षित बनाने के लिए अभियान शुरू कर दिया गया है। आरोप है कि ईरान ने रणनीतिक रूप से बेहद अहम होर्मुज स्ट्रेट में बारूदी सुरंगें बिछाई हैं, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इस्लामाबाद वार्ता फेल होने के बाद व्हाइट हाउस की पहली प्रतिक्रिया सामने आई है. न्यूयॉर्क टाइम्स ने व्हाइट हाउस के अधिकारियों के हवाले से बताया है अगले कदम का अधिकार राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर छोड़ा गया है.

इस पूरे घटनाक्रम के बीच बेंजामिन नेतन्याहू ने भी बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई अभी खत्म नहीं हुई है। नेतन्याहू के अनुसार, इजराइल ने हमले इसलिए किए क्योंकि ईरान परमाणु हथियार बनाने के बेहद करीब पहुंच चुका था। उन्होंने दावा किया कि इन हमलों से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को गंभीर नुकसान पहुंचा है।

इस्लामाबाद वार्ता के दौरान ईरानी विदेश मंत्री और ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ के बीच गहरा विवाद हो गया था। तुर्किए मीडिया की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दोनों नेताओं के बीच होर्मुज स्ट्रेट को लेकर मतभेदों की वजह से हाथापाई की नौबत आ गई थी। ऑस्ट्रेलियाई विदेश मंत्री पेनी वोंग ने अमेरिका और ईरान दोनों से युद्धविराम जारी रखने का आग्रह किया, क्योंकि वार्ता बिना किसी समझौते के समाप्त हो गई थी। वोंग ने कहा कि अब प्राथमिकता युद्धविराम जारी रखना और वार्ता को फिर से शुरू करना होना चाहिए।

अब आगे ये होगा
मध्य-पूर्व में तनाव कम होने के बजाय और बढ़ने के संकेत
वैश्विक तेल आपूर्ति पर असर पड़ने की आशंका
कूटनीतिक समाधान की राह फिलहाल कठिन
सैन्य विकल्पों की चर्चा तेज होने की संभावना


































