जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने निजी भूमि को टुकड़ों और उपविभागों में बांटकर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मुआवजा प्राप्त किया, जिससे शासन को भारी आर्थिक नुकसान हुआ
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