MORAINA NEWS. मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के सिहोनिया थाना क्षेत्र में एक झकझोर देने वाली घटना हुई। यहां के मोहनपुरा गांव में शादी से पहले की खुशियां मातम में बदल गईं। दरअसल, शादी से ठीक पहले होने वाले दूल्हे जयसिंह तोमर की हत्या कर दी गई। 20 नवंबर को जयसिंह की शादी तय थी। मगर, अब जिस घर में शहनाई बजनी थी, वहां मातम पसरा है।

पुरानी रंजिश में ली जान
जांच के मुताबिक, जयसिंह की हत्या पुरानी दुश्मनी के चलते हुई। गांव के ही एक जिला बदर बदमाश और पूर्व सरपंच ने उससे एक पुराने विवाद में समझौता करने का दबाव बनाया था। जब जयसिंह ने इनकार किया, तो आरोपी के बेटे सहित करीब छह लोगों ने 10 नवंबर को उस पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया।
घायल जयसिंह ने अस्पताल में तोड़ा दम
गंभीर रूप से घायल जयसिंह को इलाज के लिए मुरैना के अस्पताल ले जाया गया। वहां से उसे ग्वालियर रेफर किया गया। डॉक्टरों ने कई घंटे तक इलाज किया, लेकिन हालात में कोई सुधार नहीं हुआ। आखिरकार जयसिंह की जान नहीं बचाई जा सकी और उसने 3 दिन बाद दम तोड़ दिया। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर मामला दर्ज किया है।

परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
जयसिंह तोमर माता-पिता की इकलौती संतान था। बेटे की मौत की खबर मिलते ही मां बेसुध हो गईं, पिता का रो-रोकर बुरा हाल है। रिश्तेदारों और ग्रामीणों की आंखों में आंसू हैं और पूरा गांव इस घटना से सदमे में है।
गुस्साए ग्रामीणों ने लगाया जाम
हत्या की खबर फैलते ही गांव में आक्रोश फैल गया। ग्रामीणों ने पुराने कलेक्ट्रेट के सामने सड़क जाम कर प्रदर्शन किया और आरोपी की गिरफ्तारी की मांग की। दो घंटे तक मुरैना-अंबाह मार्ग से यातायात ठप रहा। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के समझाने के बाद स्थिति नियंत्रित हो सकी।

दो आरोपी गिरफ्तार, बाकी की तलाश
राष्ट्रीय क्षत्रिय समाज के अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह तोमर ने पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने और सुरक्षा देने की मांग की है। उन्होंने प्रशासन से शस्त्र लाइसेंस देने और गांव की अतिक्रमित भूमि पर गौशाला बनाने का अनुरोध किया। पुलिस ने दो नामजद आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि बाकी की तलाश जारी है।

बारात से पहले निकली अर्थी
20 नवंबर को जयसिंह की बारात निकलनी थी। मगर, इससे एक हफ्ते पहले उसकी अर्थी निकल रही है। घर सज चुका था, कार्ड बंट चुके थे, रिश्तेदार आ चुके थे। लेकिन, अब वही तारीख पूरे गांव के लिए गम की याद बन गई है। जयसिंह की मौत ने गांव में ऐसी खामोशी छोड़ दी है जो सालों तक भुलाई नहीं जा सकेगी।



































