RAIPUR NEWS. छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी हत्याकांड मामले में जगदलपुर की विशेष NIA अदालत ने बुधवार, 16 सितंबर को सभी 10 दोषियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई। अदालत ने 5 सितंबर को सभी 10 आरोपियों को दोषी करार दिया था। 25 मई 2013 को हुए इस हमले में 29 लोगों की मौत हुई थी। अदालत के फैसले के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं और झीरम घाटी हमले के गवाह शिव सिंह ठाकुर ने प्रतिक्रिया दी। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि फैसले के बावजूद मामले की कथित व्यापक साजिश से जुड़े सवालों का जवाब अभी बाकी है।

भूपेश बघेल बोले- न्याय अधूरा, जांच भी अधूरी
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया पोस्ट में अदालत के फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जिन लोगों को सजा दी गई है, वे कथित तौर पर बड़े नक्सली नेताओं के सहयोगी थे और केवल उन्हें सजा मिलने से पूरे मामले का न्याय नहीं होता। बघेल ने आरोप लगाया कि झीरम हमले की साजिश में शामिल बड़े नक्सली नेताओं की भूमिका की पर्याप्त जांच नहीं हुई। उन्होंने कहा कि NIA ने कथित साजिश की जांच नहीं की और जांच आयोग के स्तर पर भी इसे लेकर सवाल बने हुए हैं। बघेल ने कहा कि अदालत के फैसले के बावजूद उनकी यह धारणा नहीं बदली है कि “न्याय अधूरा है, क्योंकि जांच अधूरी है।”

दीपक बैज ने पूछा- बड़े नक्सलियों को कब मिलेगी सजा?
PCC चीफ दीपक बैज ने भी फैसले पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि मृत्युदंड पाने वाले 10 लोग बड़े नक्सली नेताओं के सहयोगी थे और उनके मुताबिक इनकी भूमिका अपेक्षाकृत छोटी थी। बैज ने आरोप लगाया कि झीरम घाटी हमले के पीछे जिन बड़े नक्सली नेताओं की भूमिका होने की बात कही जाती है, उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने सवाल किया कि उन लोगों को सजा कब मिलेगी, जिनके बारे में कांग्रेस लंबे समय से हमले की साजिश में शामिल होने का आरोप लगाती रही है। उन्होंने कहा कि झीरम घाटी मामले में अदालत का फैसला आया है, लेकिन कांग्रेस की नजर में पूरे मामले का न्याय तब होगा, जब कथित साजिश में शामिल लोगों की भूमिका की भी जांच होगी।

गवाह शिव सिंह ठाकुर ने भी जताया असंतोष
झीरम घाटी हमले के पीड़ित और गवाह शिव सिंह ठाकुर ने भी अदालत के फैसले पर असंतोष जताया। उन्होंने कहा कि उन्हें लगता है कि पीड़ितों को अभी पूरा न्याय नहीं मिला है। ठाकुर के मुताबिक, जांच के दौरान प्रभावित लोगों के बयान दर्ज नहीं किए गए। उन्होंने दावा किया कि घटना के समय बड़ी संख्या में नक्सली मौजूद थे और केस डायरी में दर्ज कुछ नामों से पूछताछ नहीं हुई। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि कांग्रेस नेताओं को पहचान पूछकर निशाना बनाए जाने के पीछे किसका आदेश था। ठाकुर ने कहा कि जिन लोगों को सजा मिली है, उनकी भूमिका बड़े नक्सली नेताओं के सहयोगी के तौर पर थी।

13 साल पुराने मामले में आया फैसला
झीरम घाटी हमला 25 मई 2013 को कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के काफिले पर हुआ था। इस हमले में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं समेत 29 लोगों की मौत हुई थी। मामले की सुनवाई लंबे समय तक चली और 5 सितंबर 2026 को अदालत ने मुकदमे का सामना कर रहे सभी 10 आरोपियों को दोषी ठहराया था। 16 सितंबर को अदालत ने सभी 10 दोषियों को मृत्युदंड सुनाया। आकाशवाणी की रिपोर्ट के अनुसार, दोषियों को फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील के लिए 30 दिन का समय दिया गया है।






































