RAIPUR NEWS. छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने बीज गुणवत्ता से जुड़े एक अहम मामले में किसानों के हक में बड़ा फैसला सुनाया है। आयोग ने निजी बीज कंपनी नॉबल सीड्स प्राइवेट लिमिटेड की तीनों अपीलों को खारिज करते हुए जिला उपभोक्ता आयोग के आदेश को बरकरार रखा है। इस फैसले से कबीरधाम जिले के प्रभावित किसानों को बड़ी राहत मिली है।

मामला जिले के किसान परशोत्तम निर्मलकर, भरत कश्यप और टेकुराम कश्यप से जुड़ा है। किसानों ने “नॉबल हैप्पी 101” किस्म के फूलगोभी बीज खरीदे थे, जिन्हें कंपनी ने बेहतर उत्पादन देने वाला बताया था। शुरुआती बढ़वार ठीक रहने के बाद फसल में गंभीर खामियां सामने आईं। करीब 50 से 60 प्रतिशत पौधों में फूल ही नहीं आए, जबकि जिनमें फूल आए भी, वे पीले, रेशेदार और कमजोर गुणवत्ता के थे। खराब गुणवत्ता के कारण किसानों को बाजार में उचित कीमत भी नहीं मिल सकी।

शिकायत के बाद उद्यानिकी विभाग की टीम ने मौके पर जांच की। रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि बड़ी संख्या में पौधों में फूल विकसित नहीं हुए और जो हुए भी वे मानक के अनुरूप नहीं थे। जांच में यह भी उल्लेख किया गया कि संबंधित किस्म गर्म मौसम के लिए उपयुक्त है, इसलिए मौसम को नुकसान की वजह नहीं माना जा सकता। सुनवाई के दौरान कंपनी ने तर्क दिया कि फसल खराब होने के पीछे बारिश, ओलावृष्टि और किसानों की खेती पद्धति जिम्मेदार हो सकती है।

आयोग में कंपनी अपने दावों के समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सकी। आयोग ने सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग के पूर्व फैसलों का हवाला देते हुए यह भी स्पष्ट किया कि किसानों से बीज का नमूना सुरक्षित रखने की अपेक्षा करना व्यवहारिक नहीं है। आयोग ने उद्यानिकी विभाग की जांच रिपोर्ट को विश्वसनीय मानते हुए बीज की गुणवत्ता में कमी को नुकसान का मुख्य कारण माना और कंपनी को जिम्मेदार ठहराया।

आदेश के मुताबिक, अलग-अलग मामलों में किसानों को करीब 1.67 लाख से 10.24 लाख रुपये तक का मुआवजा दिया जाएगा। इसके अलावा मानसिक पीड़ा और वाद व्यय की राशि भी अलग से देनी होगी। आयोग ने यह भी निर्देश दिया है कि यदि एक माह के भीतर भुगतान नहीं किया गया, तो कंपनी को तय राशि पर 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।




































