NEW DELHI NEWS. दिल्ली में इंडिया गठबंधन और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शनों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को सुनवाई हुई। इस दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत याचिकाकर्ता पक्ष के एक वकील पर नाराज हो गए। सुनवाई के बीच बार-बार दखल देने पर उन्होंने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा, ‘क्या कोर्ट को मछली बाजार समझ रखा है? इस तरह का आचरण नहीं चल सकता।’ चीफ जस्टिस ने याचिकाकर्ताओं को एक जैसे मुद्दों पर बार-बार मिलती-जुलती याचिकाएं दाखिल नहीं करने की भी हिदायत दी। दरअसल, दिल्ली में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ इंडिया गठबंधन और कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शनों के बाद पुलिस कार्रवाई, निगरानी और प्रदर्शन के अधिकार सहित कई मुद्दों पर सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दाखिल की गई हैं।

मंगलवार को इन मामलों पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पेश हुए। उन्होंने कोर्ट को बताया कि सभी मुद्दों पर अलग-अलग जवाब तैयार कर लिया गया है और उसे दाखिल किया जा रहा है। सुनवाई के दौरान व्यापारिक संगठनों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि दिल्ली में लगातार प्रदर्शनों के कारण कारोबार प्रभावित हो रहा है। रामलीला मैदान के आसपास बड़े थोक बाजार हैं, जहां लाखों लोगों की आजीविका जुड़ी हुई है। ऐसे में प्रदर्शन के कारण व्यापारियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने कोर्ट से इस मामले में कोई समाधान निकालने की मांग की।

एक दिन की अनुमति लेकर 17 दिन तक धरना देने का आरोप
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुनवाई के दौरान कहा कि जुलाई में प्रदर्शन के लिए एक दिन की अनुमति ली गई थी, लेकिन प्रदर्शनकारी 17 दिनों तक धरने पर बैठे रहे। इसके बाद संसद मार्च का आह्वान भी किया गया। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर प्रदर्शन करने वाले लोग निजता का भी हवाला दे रहे हैं। यदि इस तर्क को इसी तरह लागू किया जाए तो CCTV कैमरे बंद करने की मांग भी उठ सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल तस्वीरें कैप्चर होने के आधार पर किसी व्यक्ति की पहचान करके उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं किया जाता।

प्रदर्शन मौलिक अधिकार, व्यापार को आधार बनाकर नहीं रोक सकते
याचिकाकर्ता पक्ष के वकील ने दलील दी कि विरोध प्रदर्शन करना नागरिकों का मौलिक अधिकार है। जिस स्थान को प्रदर्शन स्थल बनाया जाएगा, वहां आसपास कोई न कोई व्यापारिक गतिविधि जरूर होगी। इसलिए केवल कारोबार प्रभावित होने के आधार पर प्रदर्शन के अधिकार को रोका नहीं जा सकता। इस पर सुनवाई के दौरान बार-बार बोलने वाले एक वकील को चीफ जस्टिस ने फटकार लगाई। उन्होंने अदालत की कार्यवाही में अनुशासन बनाए रखने की हिदायत दी। साथ ही कहा कि एक ही तरह के मुद्दों पर अलग-अलग मिलती-जुलती याचिकाएं दाखिल करने से सुनवाई में अनावश्यक मुश्किलें पैदा होती हैं।

प्रशांत भूषण ने उठाया निजता का मुद्दा
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने प्रदर्शनकारियों की तस्वीरें और वीडियो रिकॉर्ड करने की पुलिस की कार्रवाई का मुद्दा उठाया। उन्होंने इस संबंध में दाखिल याचिका पर भी नोटिस जारी करने की मांग की। उनका कहना था कि प्रदर्शन के दौरान लोगों की तस्वीरें और वीडियो कैप्चर करना उनकी निजता के अधिकार का उल्लंघन है। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान प्रदर्शन के मौलिक अधिकार, सार्वजनिक व्यवस्था, व्यापारियों के हित और पुलिस की निगरानी जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दे सामने आए। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी निर्धारित प्रदर्शन स्थल पर अनिश्चितकाल तक कब्जा नहीं किया जा सकता और प्रदर्शन के लिए तय समय तथा शर्तों का पालन जरूरी है।



































