NEW DELHI/WASHINGTON NEWS. पाकिस्तान में हुई शांति वार्ता के विफल होते ही पश्चिम एशिया में हालात तेजी से बिगड़ गए हैं। डोनाल्ड ट्रंप ने Strait of Hormuz पर नाकेबंदी का ऐलान कर दिया है, जिसके बाद अमेरिका और ईरान के बीच सीधा टकराव सामने आ गया है। इस फैसले ने न सिर्फ क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक स्तर पर भी तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है। अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि आज भारतीय समयानुसार शाम 7:30 बजे से होर्मुज स्ट्रेट में ईरान के बंदरगाहों की ओर आने-जाने वाले जहाजों को रोका जाएगा।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक यह कदम ईरान की तेल आपूर्ति को बाधित करने के लिए उठाया गया है। ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान की सैन्य ताकत को भारी नुकसान पहुंचा है और उसकी नौसेना लगभग खत्म हो चुकी है। उन्होंने यह भी कहा कि 158 जहाज तबाह किए जा चुके हैं और कई देश इस कार्रवाई में अमेरिका का साथ दे रहे हैं। अमेरिकी ऐलान के बाद तेहरान ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।

ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गालिबफ ने ट्रंप के दावों का मजाक उड़ाते हुए अमेरिका में बढ़ती पेट्रोल कीमतों की याद दिलाई। उन्होंने व्हाइट हाउस के पास पेट्रोल की कीमतों की तस्वीर साझा कर अमेरिकी नागरिकों को चेताया कि आने वाले समय में हालात और बिगड़ सकते हैं। ईरान ने यह भी दावा किया है कि होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह उसके नियंत्रण में है और वहां से गुजरने वाले जहाजों को रियाल में टोल देना होगा।

इस नाकेबंदी के ऐलान का असर वैश्विक बाजार पर तुरंत दिखा है। कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया है, जहां वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट 104 डॉलर प्रति बैरल और ब्रेंट क्रूड 102 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। तेल कीमतों में इस तेजी का असर दुनिया भर में देखने को मिल रहा है। कई देशों में पेट्रोल-डीजल महंगे हो गए हैं और ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर भारी दबाव बढ़ गया है।

ऑस्ट्रेलिया में हालात और भी गंभीर हो गए हैं, जहां डीजल की कीमतों में उछाल से ट्रांसपोर्ट इंडस्ट्री संकट में आ गई है। ट्रक ऑपरेटर्स का कहना है कि पहले जहां एक टैंक भरने में करीब 3600 ऑस्ट्रेलियन डॉलर खर्च होते थे, वहीं अब यह लागत बढ़कर 7500 डॉलर तक पहुंच गई है। इससे कारोबार चलाना मुश्किल होता जा रहा है। इस बीच The Wall Street Journal की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिका ईरान पर दोबारा सैन्य हमले पर भी विचार कर रहा है। व्हाइट हाउस ने संकेत दिए हैं कि हालात के अनुसार आगे की रणनीति तय की जाएगी और सभी विकल्प खुले रखे गए हैं।

ट्रंप ने चीन को भी सख्त चेतावनी दी है कि यदि उसने ईरान की सैन्य मदद की तो उस पर 50 प्रतिशत तक भारी टैरिफ लगाया जाएगा। वहीं उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी नौसेना होर्मुज स्ट्रेट में पूरी तरह नाकेबंदी लागू करेगी और ईरान को टोल देने वाले जहाजों को भी रोका जाएगा। मिडिल ईस्ट में तनाव केवल यहीं तक सीमित नहीं है। इजराइल के मंत्री इतमार बेन गविर के Al-Aqsa Mosque दौरे पर जॉर्डन ने कड़ा विरोध जताया है और इसे भड़काऊ कदम बताया है, जिससे धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।
इसी बीच ईरान ने करीब 50 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिन पर अमेरिका और इजराइल को संवेदनशील जानकारी देने का आरोप है। यह कार्रवाई भी क्षेत्र में बढ़ते तनाव का संकेत मानी जा रही है। उधर, दक्षिणी लेबनान में इजराइल के हवाई हमलों ने हालात और बिगाड़ दिए हैं। सरीफा इलाके में एक ही परिवार के चार लोगों की मौत हो गई, जिनमें एक शिशु भी शामिल है। इसके अलावा नबतियेह और मइफादौन क्षेत्रों में भी हमले किए गए हैं, हालांकि वहां नुकसान की पूरी जानकारी अभी सामने नहीं आई है।


































