kahin paan na lag jaye: धर्मनगरी चित्रकूट से अपराध और अंधविश्वास का एक बेहद हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जिसने पुलिस को भी चौंका दिया। यहां एक ऐसे शातिर गिरोह का खुलासा हुआ है, जिसका तरीका किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। गिरोह का सरगना खुद चोरी नहीं करता था, बल्कि उसने इस काम के लिए एक मुस्लिम युवक को रखा हुआ था। वजह यह थी कि उसे मंदिर में चोरी करने पर ‘पाप’ लगने का डर सताता था।

गिरफ्तार गिरोह का मास्टरमाइंड विजय शुक्ला, चित्रकूट के राजापुर का रहने वाला और पुराना हिस्ट्रीशीटर है। पुलिस पूछताछ में उसने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के चलते वह खुद मंदिर के अंदर चोरी करने से बचता था। इसलिए उसने बाबरशाह नाम के युवक को इस काम के लिए रखा था।

विजय का अंधविश्वास यहीं खत्म नहीं होता। वह मंगलवार और शनिवार को कोई वारदात नहीं करता था। इन दिनों में वह मंदिरों में दर्शन करने जाता, लेकिन उसकी नजर भगवान की भक्ति पर नहीं बल्कि कीमती मुकुट, सोने-चांदी के छत्र और अन्य आभूषणों पर होती थी। इन दिनों वह रैकी कर चोरी की पूरी योजना बनाता था।

kahin paan na lag jaye: चोरी के दौरान विजय मंदिर के बाहर खड़ा होकर निगरानी करता था, जबकि बाबरशाह अंदर जाकर मूर्तियों से मुकुट और छत्र उतारता और बाहर लाकर उसे देता। इसके बाद दोनों मौके से फरार हो जाते।

चोरी के बाद विजय गहनों को गलाकर सोने-चांदी की सिल्लियों में बदल देता था। फिर इन्हें आगरा ले जाकर एक परिचित सोनार को बेच देता था। पुलिस ने विजय और बाबरशाह की निशानदेही पर उस सोनार को भी गिरफ्तार कर लिया है, जो चोरी का माल खरीदता था।
kahin paan na lag jaye: पुलिस के मुताबिक, विजय शुक्ला पर पहले से ही गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। करीब 20 साल पहले वह एक हत्या के मामले में भी शामिल रहा है। पुलिस के दबाव के चलते उसने अपनी पहचान बदलकर आगरा में रहना शुरू कर दिया था। कुछ समय बाद वह फिर चित्रकूट लौटा और मंदिरों में चोरी की घटनाओं को अंजाम देने लगा।

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से कई मंदिरों के चोरी हुए सामान बरामद किए हैं, जिनमें भरतकूप के राम-जानकी मंदिर के मुकुट, पहाड़ी थाना क्षेत्र के अकेलवा बाबा हनुमान मंदिर के छत्र और कर्वी के बाल हनुमान मंदिर की गदा सहित अन्य आभूषण शामिल हैं।
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लगातार हो रही चोरी की घटनाओं के बाद पुलिस और सर्विलांस टीम ने जांच तेज की। सूचना मिलने पर आरोग्यधाम क्षेत्र की एक धर्मशाला में दबिश दी गई, जहां से गिरोह के सरगना विजय शुक्ला, उसके साथी बाबरशाह और एक सोनार को गिरफ्तार कर लिया गया।



































