PRAYAGRAJ NEWS. बच्चों से कथित यौन शोषण के आरोप में दर्ज एफआईआर के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ जांच ने रफ्तार पकड़ ली है। सोमवार दोपहर प्रयागराज पुलिस की एक टीम वाराणसी पहुंची। इस बीच, 23 फरवरी की सुबह वाराणसी स्थित आश्रम में शंकराचार्य ने अपने वकीलों के साथ बैठक की। माना जा रहा है कि वे अग्रिम जमानत या अन्य कानूनी राहत के लिए हाईकोर्ट का रुख कर सकते हैं। बाद में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि वे कहीं भाग नहीं रहे और जांच में सहयोग करेंगे। उन्होंने आरोपों को खारिज करते हुए दावा किया कि जिन छात्रों के शोषण की बात कही जा रही है, वे उनके गुरुकुल के नहीं हैं।

इसके साथ ही उन्होंने जांच किसी ऐसे राज्य की पुलिस से कराने की मांग की जहां भाजपा की सरकार न हो। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा- हम समय-समय पर जनता से मिलते हैं। यह सरकार चाहती है कि हम ही धर्मचारी और सरकार हों। देश में 4 शंकराचार्य हैं जो सनातन धर्म की रक्षा करते आए हैं। अब इन्होंने उन पर प्रहार करना शुरू कर दिया है। सच्चाई कभी समाप्त नहीं होती है बल्कि वह सदा बनी रहती है। शंकराचार्य ने यह भी कहा कि संबंधित बच्चों का उनके गुरुकुल में कभी पंजीकरण नहीं हुआ और वे किसी अन्य जिले के विद्यालय के छात्र बताए जा रहे हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि उनके सामाजिक-धार्मिक मुद्दों पर उठाए जा रहे सवालों की वजह से उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। साथ ही उन्होंने यह प्रश्न भी उठाया कि बच्चों के अभिभावक और जुवेनाइल बोर्ड की भूमिका स्पष्ट क्यों नहीं है। पुलिस का कहना है कि सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच की जा रही है और अदालत के निर्देशों के अनुसार कार्रवाई होगी। मामले में आगे की कानूनी और पुलिस कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।

इससे पहले पुलिस शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी के साथ माघ मेला क्षेत्र पहुंची और उस स्थान का निरीक्षण किया जहां शंकराचार्य का शिविर लगा था। टीम ने शिविर के प्रवेश-निकास मार्गों और आसपास के इलाके का नक्शा तैयार किया। बताया जा रहा है कि घटना से जुड़े समय और स्थान की पुष्टि के लिए सीसीटीवी, मोबाइल लोकेशन और अन्य तकनीकी साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।

मामले की पृष्ठभूमि में 24 जनवरी को पुलिस आयुक्त को दी गई शिकायत है, जिसमें माघ मेला-2026 और महाकुंभ-2025 के दौरान बच्चों के साथ दुराचार के आरोप लगाए गए थे। 8 फरवरी को कार्रवाई न होने का आरोप लगाते हुए स्पेशल पॉक्सो कोर्ट में वाद दायर किया गया। 13 फरवरी को दो बच्चों को कोर्ट में पेश किया गया और 21 फरवरी को उनके बयान कैमरे के सामने दर्ज किए गए। कोर्ट के निर्देश पर उसी दिन झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज हुई। इसमें अविमुक्तेश्वरानंद, उनके शिष्य मुकुंदानंद और 2–3 अज्ञात लोगों को नामजद किया गया है।

































