NEW DELHI NEWS. आज स्मार्टफोन का मतलब ही एप्स से जुड़ गया है, लेकिन आने वाले सालों में यह पहचान पूरी तरह बदल सकती है। टेक्नोलॉजी की रफ्तार इतनी तेज हो गई है कि जिस फोन को हम ऐप्स का खजाना मानते हैं, वही फोन बिना किसी ऐप के भी हर काम कर पाएगा। Amazon के एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्मार्टफोन के भविष्य को लेकर ऐसा दावा किया है, जिसने टेक इंडस्ट्री में नई बहस छेड़ दी है। हर दिन बदलती टेक्नोलॉजी हमारे इस्तेमाल के तरीके को भी बदल रही है। आज बैंकिंग से लेकर शॉपिंग, मनोरंजन से लेकर ऑफिस का काम तक, सब कुछ स्मार्टफोन ऐप्स के जरिए होता है। लेकिन Amazon के डिवाइसेस और सर्विसेज प्रमुख पैनोस पने का मानना है कि यह दौर अब ज्यादा लंबा नहीं चलने वाला।

हाल ही में एक इंडस्ट्री कॉन्फ्रेंस के दौरान पैनोस पने ने कहा कि स्मार्टफोन ऐप्स का दौर धीरे-धीरे खत्म हो रहा है। भविष्य में यूजर्स को अलग-अलग ऐप डाउनलोड करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। उनकी जगह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ले लेगी, जो बिना किसी ऐप के ही यूजर की जरूरतों को पूरा करेगी। उनका कहना है कि आने वाले समय में फोन पर उंगलियां चलाने, मेन्यू ढूंढने या अलग-अलग इंटरफेस समझने की जरूरत कम होती जाएगी। AI खुद यूजर की आदतों और जरूरतों को समझकर काम करेगा।

पैनोस पने के मुताबिक भविष्य के स्मार्टफोन ऐसे होंगे जहां सर्विस सीधे मिलेगी। यानी किसी काम के लिए अलग ऐप खोलने के बजाय यूजर सीधे AI से बात करेगा या कमांड देगा और काम हो जाएगा। चाहे टिकट बुक करना हो, रास्ता खोजना हो या किसी सवाल का जवाब चाहिए हो—सब कुछ बिना ऐप्स के संभव होगा। Amazon अधिकारी ने इस बदलाव को एम्बिएंट इंटेलिजेंस का नाम दिया है। इसका मतलब है ऐसी टेक्नोलॉजी जो हमारे आसपास इस तरह घुल-मिल जाएगी कि उसका अहसास ही नहीं होगा। फोन, डिवाइस या स्क्रीन पीछे रह जाएंगे और टेक्नोलॉजी खुद-ब-खुद आपकी जरूरत के मुताबिक काम करेगी।

पैनोस पने का मानना है कि युवाओं का बदलता व्यवहार भी इस बदलाव की बड़ी वजह है। खासकर Gen Z अब लगातार सोशल मीडिया फीड और ऐप्स में उलझे रहने से थकने लगी है। वे तेज, आसान और सीधे समाधान चाहते हैं। इसी सोच को ध्यान में रखकर Amazon अपनी डिजिटल असिस्टेंट Alexa को सिर्फ एक डिवाइस नहीं, बल्कि हर वक्त साथ रहने वाले डिजिटल साथी के रूप में विकसित कर रहा है।

पैनोस पने के अनुसार AI की असली सफलता नए ऐप बनाने में नहीं, बल्कि ऐप्स की जरूरत को खत्म करने में है। आने वाले समय में लोग टेक्नोलॉजी से बोलकर, इशारों से या नेचुरल तरीके से जुड़ेंगे। हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि इस पूरी प्रक्रिया में यूजर का भरोसा सबसे अहम होगा। अगर भरोसा टूटा, तो सबसे एडवांस टेक्नोलॉजी भी लोगों के काम की नहीं रह जाएगी।




































