BILASPUR. शहर में बीते 14 दिसंबर को हुई कांग्रेस नेता व हिस्ट्रीशीटर संजू त्रिपाठी की हत्या के मामले में एक शूटर बिलासपुर पुलिस के कब्जे में आ गया है। उसे उत्तर प्रदेश एटीएस ने पिछले दिनों पकड़ा था, जिसे बिलासपुर पुलिस को सौंपा गया है। वहीं उत्तर प्रदेश के रहने वाले इस शूटर ने वारदात में शामिल पांच और शूटर्स के नाम पर और पहचान बता दिए हैं, जिनकी तलाश में पुलिस जुट गई है।

दरअसल, हिस्ट्रीशीटर संजू त्रिपाठी की हत्या उसके ही भाई कपिल त्रिपाठी ने कराई थी। इसमें उसके पिता के साथ कपिल की पत्नी, उसकी मुंहबोली बहन और जीजा भी शामिल थे। इन सभी को पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। कपिल से पूछताछ और मौके पर मिले साक्ष्य से स्पष्ट था कि वारदात को पेशेवर शूटर्स के जरिए अंजाम दिया गया है। सिलसिलेवार पूछताछ के बाद रायगढ़ से उन आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया गया था, जिन्होंने न सिर्फ हथियार उपलब्ध कराए, बल्कि उत्तर प्रदेश के शूटर्स से संपर्क भी कराया था। बिलासपुर पुलिस शूटर्स की तलाश में तो थी ही, इसके अलावा उत्तर प्रदेश की पुलिस से भी सहयोग मांगा गया था।
यूपी पुलिस व एटीएस का ध्यान इस पर था। इसी एटीएस को प्रशीन नाम का शूटर मिला, जिसे संदिग्ध गतिविधियों के चलते पकड़ा गया था। उसने पूछताछ में बिलासपुर में वारदात करने की जानकारी दी। स्पष्ट था कि वह बिलासपुर के संजू त्रिपाठी हत्याकांड की बात कह रहा है। लिहाजा एटीएस ने बिलासपुर पुलिस से संपर्क किया और चर्चा से स्पष्ट हो गया कि ये उन्हीं शूटर्स में से एक है, जिन्होंने मिलकर इस वारदात को अंजाम दिया गया था।

यूपी लेकर आई पुलिस, ये हैं बाकी शूटर्स
एटीएस से चर्चा के बाद बिलासपुर पुलिस शूटर प्रशीन को लेने उत्तर प्रदेश गई। एसएसपी पारुल माथुर ने सोमवार को उसे मीडिया के सामने पेश किया और बताया कि इसने पांच और शूटर्स के नाम भी बताए हैं, जिन्होंने मिलकर इस वारदात को अंजाम दिया है। इसके मुताबिक प्रशीन ने बताया कि करीब छह माह पहले बनारस के विनय द्विवेदी उर्फ गुरुजी उर्फ वासु से उसकी मुलाकात हुई थी। तब उसे कहा कि बिलासपुर जाकर एक काम करने के एवज में उसे लाख रुपये मिलेंगे। इसी सिलसिले में वह नौ दिसंबर को बिलासपुर आया और प्रेम श्रीवास नाम के युवक से मिला। उसके साथ विनय बस से बिलासपुर आया। दोनों अमेरी में स्थित संजू के भाई कपिल त्रिपाठी के घर पहुंचे। कपिल के घर में दानिश अंसारी व बनारस निवासी एजाज अंसारी उर्फ सोनू पहले से थे। फिर 11 दिसंबर को बनारस निवासी पप्पू दाढ़ी भी आया। रात में ही योजना बनी और फिर 14 दिसंबर को अंजाम दिया गया।





































