बेलपत्र और धतूरा ही उनको भाता है। औघड़ी तो इतने हैं कि प्रसन्न हो जाएं, तो मार्कंडेय ऋषि को चिंरजीवी कर देते हैं, जिनकी उम्र ब्रह्मा जी ने महज पांच वर्ष ही तय की थी। Read More





























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