RAIPUR. प्रदेश में नए सिरे से आरक्षण देने के लिए राज्य सरकार ने नया आरक्षण संशोधन विधायक विधानसभा में पारित करने के बाद राजभवन में राज्यपाल से हस्ताक्षर कराने के लिए भेजा है। वहीं राज्यपाल अनुसुईया उईके ने हस्ताक्षर करने के बजाय राज्य सरकार से ही 10 बिंदुओं में सवाल किए हैं, जिसके जवाब से संतुष्ट होने के बाद उन्होंने हस्ताक्षर करने की बात कही है। अब राज्य शासन ने उनकी आशंकाओं पर आधारित सवालों के जवाब दे दिए हैं। वहीं अब मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि अब तो हस्ताक्षर करने में देरी नहीं होनी चाहिए।

आपको बता दें कि राज्य सरकार ने जिस आरक्षण संशोधन विधेयक को विधानसभा में पेश कर पारित कराया है उसमें सबसे बड़ा सवाल उसकी वैधानिकता को लेकर है। दरअसल, इससे प्रदेश में आरक्षण बढ़कर 76 प्रतिशत हो जाएगा। ऐसे में क्या जब आरक्षण 58 प्रतिशत होने पर सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व में निर्धारित आरक्षण कानून को खारिज कर दिया था, तो ये कानून वहां टिक पाएगा। इस प्रमुख सवाल के अलावा राज्यपाल अनुसुईया ने कुल 10 बिंदुओं में सवाल राज्य सरकार को भेजे थे। इससे पहले भी विभिन्न मंचों पर उन्होंने कहा था कि उनके सवालों का जवाब यदि राज्य सरकार दे देती है तो वे बिल पर हस्ताक्षर कर देंगी। बाद में उन्होंने सवालों का पुलिंदा भी भेज दिया। अब जब सरकार ने जवाब भी उन्हें भेज दिए हैं तो मुख्यमंत्री का बयान भी सामने आया है। इसमें उन्होंने कहा है कि अब तो बिल पर हस्ताक्षर करने में बिल्कुल भी देरी नहीं की जानी चाहिए।
जानिए राज्यपाल के राज्य सरकार से पूछे 10 सवाल
सवाल नंबर 1
क्या विधेयक पारित करने से पहले अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति का कोई डाटा जुटाया गया था? यदि हां तो उसका विवरण दें।
सवाल नंबर 2
साल 1992 में आए इंद्रा साहनी बनाम भारत संघ मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षित वर्गों के लिए आरक्षण 50 प्रतिशत से अधिक करने के लिए विशेष व बाध्यकारी परिस्थितियों की शर्त लगाई थी। उन विशेष व बाध्यकारी परिस्थितियों से संबंधित विवरण क्या हैं?
सवाल नंबर 3
हाई कोर्ट में चल रहे मामले में सरकार ने आठ सारिणी दी थी। उन्हें देखने के बाद कोर्ट का कहना था कि ऐसा कोई विशेष प्रकरण निर्मित नहीं किया गया है जिससे आरक्षण की सीमा को 50 प्रतिशत से अधिक किया जाए। ऐसे में अब राज्य के सामने ऐसी क्या परिस्थिति पैदा हो गई जिससे आरक्षण की सीमा 50 प्रतिशत से अधिक की जा रही है?
सवाल नंबर 4
सरकार बताए कि प्रदेश के अनुसूचित जाति और जनजाति के लोग किस प्रकार से समाज के सामाजिक, आर्थिक व शैक्षणिक रूप से पिछड़ों की श्रेणी में आते हैं?
सवाल नंबर 5
आरक्षण पर चर्चा के दौरान मंत्रिमंडल के सामने तमिलनाडु, कर्नाटक व महाराष्ट्र में 50 प्रतिशत से अधिक आरक्षण का उदाहरण रखा गया था। उन राज्यों ने तो आरक्षण बढ़ाने से पहले आयोग का गठन कर उसका परीक्षण कराया था। छत्तीसगढ़ ने भी ऐसी किसी कमेटी या आयोग का गठन किया हो तो उसकी रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
सवाल नंबर 6
क्वांटिफायबल डाटा आयोग की रिपोर्ट पेश की जाए।
सवाल नंबर 7
विधेयक के लिए विधि विभाग का सरकार को मिली सलाह की जानकारी दी जाए। राजभवन में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग को आरक्षण देने के लिए बने कानून में सामान्य वर्ग के गरीबों के आरक्षण के लिए अलग विधेयक पारित क्यों नहीं किया गया है।
सवाल नंबर 8
अनुसूचित जाति व जनजाति के व्यक्ति सरकारी सेवाओं में चयनित क्यों नहीं हो पा रहे हैं?
सवाल नंबर 9
सरकार ने आरक्षण का आधार अनुसूचित जाति व जनजाति के दावों को बताया है। वहीं संविधान का अनुच्छेद 335 में स्पष्ट है कि सरकारी सेवाओं में नियुक्तियां करते समय अनुसूचित जाति और जनजाति समाज के दावों का प्रशासन की दक्षता बनाए रखने की संगति के अनुसार ध्यान रखा जाएगा।
सवाल नंबर 10
सरकार यह बताए कि इतना आरक्षण लागू करने से प्रशासन की दक्षता पर क्या असर पड़ेगा, इसके लिए क्या कहीं कोई सर्वे कराया गया है?







































