औषधीय पौधों के सरंक्षण पर कार्यशालाः76 विभिन्न प्रजातियों के औषधीय पौधों पर मंथन

छत्तीसगढ़ राज्य जैव विविधता बोर्ड एवं फाउंडेशन फॉर रेवाइटलाइजेशन ऑफ लोकल हेल्थ ट्रेडिशन्स के सयुंक्त तत्वाधान में आयोजन किया गया है। तीन दिवसीय चलने वाली कार्यशाला का मंगलवार को पहला दिन था।

रायपुर (raipur)। छत्तीसगढ़ (chhattisgarh) के जंगलों में बेशकीमती औषधीय पौधे (medicinal plants) बिखरे पड़े हैं। यहां के कंदमूल, पेड़-पौधों से अनेक तरह की जीवनरक्षक (Life-saving) दवाइयां (medicines) बनाई जाती है। ऐसे में इसके संरक्षण (conservation) की पहल की जा रही है।

इसी उद्देश्य से औषधीय पौधों के सरंक्षण, पूर्व मूल्यांकन और प्राथमिक प्रबंधन को लेकर कार्यशाला (workshop) का आयोजन किया गया है। छत्तीसगढ़ राज्य जैव विविधता बोर्ड एवं फाउंडेशन फॉर रेवाइटलाइजेशन ऑफ लोकल हेल्थ ट्रेडिशन्स के सयुंक्त तत्वाधान में आयोजन किया गया है। तीन दिवसीय चलने वाली कार्यशाला का मंगलवार को पहला दिन था।

76 औषधीय पौधों की सूची पर मंथन
मेंबर सेक्रेटरी छत्तीसगढ़ (chhattisgarh) एस्टेट बायो डायवर्सिटी बोर्ड (Estate Bio Diversity Board) अरुण कुमार पांडेय ने कहा सर्वे से 76 अलग-अलग प्रजातियों के औषधीय पौधों को लेकर बनी सूची में मंथन किया गया। मंथन के बाद तैयार लिस्ट को IUCM अंतरराष्ट्रीय संस्था को सूची भेजी जाएगी।

ये है कार्यशाला का उद्देश्य
अरुण कुमार पांडेय ने बताया कि इस आयोजन के पीछे का मक़सद यह है कि जो छत्तीसगढ़ में मेडिसिन प्लांट हैं, वन औषधियां है उनका एक असेसमेंट करना है। उनका थ्रेट लेबल क्या है, बढ़ रही, घट रही, कि संकट के दौर से गुज़र रहा है इसके लिए एक संस्था को चुना गया है। विश्व स्तर पर ख्याति प्राप्त संस्था एफ़आरएलएसटी बैंगलोर है।

सुरक्षित रखने को लेकर चर्चा
उन्होंने बताया कि पहले अपनी टीम बनाई उसके बाद छत्तीसगढ़ में जगह-जगह कैंप किया। सभी को अलग-अलग कैटेगरी में उनकी सूची बनाई गई और इसी को लेकर यह तीन दिवसीय मंथन (brainstorming) का आयोजन किया जा रहा है। इन प्रजातियों के पौधों को भविष्य में कैसे सुरक्षित रखना है इसको लेकर चर्चा की जाएगी।

एक साल चला फ़िल्ड सर्वे
पिछले एक वर्ष से जो फ़िल्ड सर्वे हुआ उसके बाद 76 अलग-अलग प्रजातियों की सूची आई है। इन प्रजातियों के अंतिम असेसमेंट करेंगे कि आगे इनको कैसे सुरक्षित किया जाए। तीन दिवसीय मंथन में इन जड़ी बूटियों के विकास एवं सुरक्षा को लेकर लिस्ट फ़ाइनल किया जाएगा। उसके बाद लिस्ट को IUCM अंतरराष्ट्रीय संस्था जो ऐसे प्रजातियों के लिस्टिंग करती है। यहां से जो तैयार लिस्ट हैं कि कौन सा संकट में है, कौन विलुप्त हो रहा है, कौन विकास कर रहा है फिर वो लिस्ट में शामिल किया जाएगा। सर्वे में स्थानीय लोगों के साथ वैद्य, फ़ॉरेस्ट के लोगों को शामिल किया गया था।

(TNS)