रेडी-टू-ईट फूड का काम स्व सहायता समूह से छीना, तीन लाख परिवारों पर पड़ेगा असर

रायपुर। छत्तीसगढ़ में चल रही रेडी टू ईट योजना से महिला स्व-सहायता समूह को बाहर कर दिया गया है। बताया जा रहा है कि आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से महिलाओं और बच्चों में कुपोषण दूर करने के लिए वितरित किए जा रहे रेडी टू ईट पोषण आहार की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए केंद्रीयकृत व्यवस्था अपनाई जाएगी। इस फैसले के बाद करीब 30 हजार स्व सहायता समूह से जुड़ी करीब तीन लाख से ज्यादा महिलाओं के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के ट्वीट कर इस केंद्रीयकरण की योजना की जानकारी देने की बात फैलने के बाद महिलाओं का गुस्सा फूट पड़ा है। विरोध में गुरुवार को कवर्धा में सैकड़ों की संख्या में महिलाओं ने प्रदर्शन किया। कवर्धा में जिले भर के करीब 30 से अधिक महिला स्व सहायता समूहों की सैकड़ों महिलाओं ने प्रदर्शन किया। कलेक्ट्रेट का घेराव करने पहुंची महिलाओं ने कहा कि जिले में 48 समूह इस काम में लगे हुए हैं।

बताते चलें कि पूरक पोषण आहार व्यवस्था के तहत टेक होम राशन में रेडी टू ईट फूड निर्माण महिला स्व-सहायता समूह कर रहे थे। वही इसके वितरण की जिम्मेदारी भी संभालते हैं। राज्य में साल 2009 से संचालित रेडी टू ईट योजना में आंगनवाड़ी केंद्रों के बच्चों से लेकर किशोरियों और शिशुवती महिलाओं को तैयार भोजन दिया जाता है। इसके लिए 500 करोड़ रुपए से ज्यादा का बजट तय किया गया है।

बताते चलें कि महिला बाल विकास विभाग के जरिए आंगनवाड़ी केंद्रों के बच्चों के साथ ही अन्य लोगों को रेडी-टू ईट फूड कुपोषण दूर करने के लिए दिया जाता है। इसका बड़ा हिस्सा आंगनवाड़ी केंद्रों में आने वाले बच्चों पर जाता है। फूड में मिलाए जाने वाले खाद्य पदार्थों में गेहूं का आटा, सोयाबीन, सोयाबीन तेल, शक्कर, मूंगफली, रागी और चना शामिल हैं।

(TNS)