RAIPUR NEWS. छत्तीसगढ़ में प्रस्तावित धर्म स्वातंत्र्य संशोधन विधेयक 2026 को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने इस विधेयक को लेकर भाजपा पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि धर्मांतरण का मुद्दा भाजपा के लिए चुनावी हथियार और राजनीतिक एजेंडा बन गया है।

बैज ने कहा कि यह विधेयक पहले वर्ष 2006 में पारित किया गया था, लेकिन उस समय राज्यपाल ने इसे वापस कर दिया था। उन्होंने सवाल उठाया कि लगभग दो दशकों तक इस मुद्दे पर चुप रहने के बाद भाजपा अब इसे अचानक क्यों उठा रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के दौरान ही सबसे अधिक धर्मांतरण हुए हैं। उनका कहना है कि भाजपा जाति और धर्म की राजनीति करती है और लोगों को आपस में बांटकर राजनीतिक लाभ उठाती है, जबकि विकास से उसका कोई सरोकार नहीं है।
दिल्ली में आदिवासी कांग्रेस की राष्ट्रीय सलाहकार समिति की बैठक से लौटने के बाद बैज ने बताया कि आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक सलाहकार समिति का गठन किया गया है। इसी तर्ज पर प्रदेश में भी आदिवासी सलाहकार समिति बनाई जाएगी, जो उनके मुद्दों को उठाने और समाधान के लिए कार्य करेगी।

बैज ने भाजपा की डबल इंजन सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि जल, जंगल, जमीन और खनिज संसाधनों की लूट हो रही है, जिसे रोकना बड़ी चुनौती बन गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आदिवासी मुद्दे केवल चुनावी राजनीति तक सीमित नहीं हैं।
इसके अलावा, गैस सिलेंडर की कमी और कालाबाजारी के मुद्दे पर भी उन्होंने सरकार को घेरा। बैज ने भाजपा नेताओं को चुनौती दी कि वे जमीनी हकीकत जानने के लिए गैस एजेंसियों पर जाकर जनता से बातचीत करें, बजाय इसके कि दफ्तरों में बैठकर समस्या से इनकार करें।

क्या है धर्म स्वातंत्र्य संशोधन विधेयक 2026?
यह एक प्रस्तावित कानून है, जिसका उद्देश्य राज्य में जबरन या अवैध धर्मांतरण पर रोक लगाना है। सरकार के अनुसार, यह विधेयक नागरिकों की धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए लाया गया है।
विधेयक में अवैध धर्मांतरण को बल, प्रलोभन, दबाव, कपट और डिजिटल माध्यम से किए गए परिवर्तन के रूप में परिभाषित किया गया है। साथ ही, अपने मूल धर्म में वापसी को धर्मांतरण नहीं माना जाएगा।
इस प्रकार के अपराध को संज्ञेय और गैर-जमानती बनाया गया है, जिसकी सुनवाई विशेष न्यायालय में होगी।

सजा के प्रावधान:
सामान्य मामलों में 7 से 10 वर्ष की सजा और 25 लाख रुपये से अधिक जुर्माना निर्धारित किया गया है।
नाबालिग, महिला और SC/ST/OBC के खिलाफ अपराध में 10 से 20 वर्ष की सजा और 10 लाख रुपये से अधिक जुर्माना लगाया जाएगा।
सामूहिक धर्मांतरण के मामलों में 10 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास और 25 लाख रुपये से अधिक जुर्माने का प्रावधान है।
सूचना संबंधी नियम:
स्वैच्छिक धर्मांतरण के लिए संबंधित व्यक्ति को जिला मजिस्ट्रेट को पूर्व सूचना देनी होगी और 30 दिनों तक सार्वजनिक सूचना जारी करनी होगी।



































