DURG NEWS. छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के सामोदा गांव में प्रशासन और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में अफीम की बड़े पैमाने पर हो रही अवैध खेती का खुलासा हुआ है। जांच में करीब साढ़े 9 एकड़ जमीन पर अफीम की खेती पाए जाने की पुष्टि हुई है। आरोप है कि इस अवैध खेती को छिपाने के लिए खेत के चारों ओर बाउंड्री और गेट लगाया गया था, जबकि निगरानी के लिए बाउंसर भी तैनात किए गए थे।प्राथमिक जांच में सामने आया है कि अफीम के पौधों को मक्का, पपीता और केला जैसी सामान्य फसलों के बीच लगाया गया था, ताकि बाहर से देखने पर यह साधारण खेती लगे।

वहीं, अफीम की अवैध खेती के मामले में भारतीय जनता पार्टी ने सख्त कदम उठाया है। पार्टी ने इस प्रकरण में नाम सामने आने के बाद किसान मोर्चा से जुड़े नेता विनायक ताम्रकार को पार्टी से निष्कासित कर दिया है। भारतीय जनता पार्टी, छत्तीसगढ़ प्रदेश कार्यालय की ओर से 7 मार्च 2026 को जारी आदेश में बताया गया है कि विनायक ताम्रकार, जो प्रदेश संयोजक (राइस मिल प्रसंस्करण प्रकल्प) किसान मोर्चा के पद पर थे, उनके आचरण और कृत्य से पार्टी की छवि धूमिल हुई है। आदेश में कहा गया है कि उनका कृत्य पार्टी अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है। इसी आधार पर प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव के निर्देश पर उन्हें तत्काल प्रभाव से पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है।

सूत्रों के अनुसार, तीन दिन पहले ही अफीम के फल कंटेनर के जरिए कहीं और भेजे जा चुके थे। ग्रामीणों का दावा है कि इस इलाके में पिछले करीब चार वर्षों से अफीम की खेती की जा रही थी, लेकिन इसकी भनक किसी को नहीं लगी। संदेह के आधार पर पुलिस ने जमीन से जुड़े भाजपा नेता विनायक ताम्रकार को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की है। ग्रामीणों का कहना है कि खेती का संचालन विनायक ताम्रकार, उनके भाई विमल ताम्रकार और ब्रजेश ताम्रकार कर रहे थे।

बताया जा रहा है कि जिस जमीन पर खेती की जा रही थी, वह प्रीति बाला ताम्रकार और मधुमति ताम्रकार के नाम दर्ज है। सूत्रों के मुताबिक मजदूरों को अलग-अलग राज्यों से बुलाया गया था। खेती के काम के लिए मध्य प्रदेश के खंडवा से मजदूर लाए गए थे। कपास की फसल की जिम्मेदारी राजस्थान के मजदूरों को दी गई थी।पुलिस ने पूछताछ के लिए राजस्थान के दो मजदूरों को भी हिरासत में लिया है।

बच्चों की फोटो से खुला राज
एएसपी सुखनंदन राठौर के मुताबिक यह मामला एक दिलचस्प तरीके से सामने आया। होली के दिन गांव के बच्चों ने खेत की फोटो खींचकर गांव के व्हाट्सएप ग्रुप में साझा कर दी। गांव के सरपंच अरुण गौतम ने जब तस्वीरों को इंटरनेट पर उपलब्ध अफीम के पौधों से मिलान किया, तब शक पक्का हुआ और इसकी सूचना प्रशासन को दी गई। ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि फोटो शेयर करने वाले बच्चे को खेत की सुरक्षा में लगे बाउंसरों ने बुरी तरह पीटा था। डर के कारण वह बच्चा अभी सामने नहीं आ रहा है।

जानकारों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में अफीम की कीमत करीब 5 लाख रुपए प्रति किलो तक बताई जाती है। ऐसे में इतनी बड़ी खेती मिलने के बाद इस मामले में किसी बड़े नेटवर्क के जुड़े होने की आशंका भी जताई जा रही है। दुर्ग कलेक्टर अभिजीत सिंह ने बताया कि सूचना मिलते ही वे पुलिस अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि इस वर्ष धान कटाई से पहले खेतों का डिजिटल सर्वे कराया गया था। इसी कारण पटवारी से खेत की गिरदावरी रिपोर्ट मांगी गई है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि सर्वे के दौरान खेत में किस फसल का रिकॉर्ड दर्ज किया गया था।


































