BILASPUR NEWS. छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पुलिस कॉन्स्टेबल भर्ती प्रक्रिया को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि भर्ती के दौरान खाली रह जाने वाले पदों को प्रतीक्षा सूची (Waiting List) के उम्मीदवारों से भरा जाए। इसके साथ ही कोर्ट ने इस मामले से जुड़ी सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया है।

पुलिस विभाग में करीब 5967 पदों के लिए भर्ती निकली थी। विज्ञापन की शर्तों के अनुसार, अभ्यर्थियों को एक से अधिक जिलों में आवेदन करने की अनुमति दी गई थी। इसके चलते कई योग्य अभ्यर्थी एक साथ कई जिलों की मेरिट सूची में चयनित हो गए। याचिकाओं में आरोप लगाया गया था कि विभाग ने जिलावार वेटिंग लिस्ट जारी नहीं की है, जिससे कई योग्य उम्मीदवार चयन से वंचित रह जाएंगे क्योंकि एक अभ्यर्थी के कई जगह चुने जाने से वास्तविक रूप से बड़ी संख्या में पद खाली रह जाएंगे।

राज्य सरकार और हाईकोर्ट का रुख
मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने दलील दी कि चयन सूची मेरिट के आधार पर जिला स्तर पर तैयार की गई है। वास्तविक स्थिति तब स्पष्ट होगी जब चयनित अभ्यर्थी किसी एक स्थान पर जॉइनिंग लेंगे। इसके बाद अन्य स्थानों पर उनके द्वारा छोड़े गए पद स्वतः खाली हो जाएंगे।

हाईकोर्ट ने सरकार की दलील को स्वीकार करते हुए आदेश दिया कि राज्य शासन पहले चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति और जॉइनिंग की प्रक्रिया पूरी करे। इसके बाद जो भी पद रिक्त रह जाते हैं, उन्हें नियमानुसार प्रतीक्षा सूची के उम्मीदवारों से भरा जाए।

भर्ती प्रक्रिया में धांधली के भी लगे आरोप
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने फिजिकल टेस्ट में बड़ी गड़बड़ी और भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए। कोर्ट को बताया गया कि बिलासपुर एसएसपी ने भी फिजिकल टेस्ट के दौरान हुई खामियों पर आधिकारिक रिपोर्ट दी थी। आरोप है कि डेटा रिकॉर्डिंग करने वाली आउटसोर्स कंपनी ने निष्पक्षता नहीं बरती और करीब 129 अभ्यर्थियों को गलत तरीके से फायदा पहुँचाया गया। यहाँ तक कि फिजिकल टेस्ट की सीसीटीवी फुटेज भी डिलीट कर दी गई।

फिलहाल, हाईकोर्ट के इस ताजा आदेश से उन अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है जो वेटिंग लिस्ट में होने के कारण अपनी नियुक्ति की उम्मीद लगाए बैठे थे।




































