BILASPUR NEWS. छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि केवल विभागीय औपचारिकताओं या प्रशासनिक प्रक्रियाओं के नाम पर अपील दायर करने में होने वाली अत्यधिक देरी को माफ नहीं किया जा सकता। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने बिलासपुर नगर निगम आयुक्त द्वारा 121 दिनों के विलंब से दायर रिट अपील को खारिज कर दिया है।

बिलासपुर नगर निगम के एक दमकलकर्मी, गिरीश शर्मा के नियमितीकरण को लेकर हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने 30 अप्रैल 2025 को एक आदेश पारित किया था। इस आदेश के खिलाफ नगर निगम आयुक्त को अपील दायर करनी थी, लेकिन यह अपील निर्धारित समय सीमा से 121 दिन की देरी के बाद 14 अक्टूबर 2025 को दायर की गई।

कोर्ट में दी गई दलीलें
निगम के अधिवक्ता रणबीर सिंह मरहास ने तर्क दिया कि यह विलंब जानबूझकर नहीं किया गया था उन्होंने बताया कि कानूनी राय लेने, शहरी प्रशासन विभाग से पत्राचार करने और फाइल को विभिन्न अधिकारियों से अनुमोदित कराने में समय लगादमकलकर्मी के अधिवक्ता मनोज कुमार सिन्हा ने इस अपील का कड़ा विरोध किया। उन्होंने दलील दी कि इसी तरह के एक मामले में कोर्ट पहले भी देरी के कारण अपील खारिज कर चुका है ।
हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी
डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में कहा कि उदारता के आधार पर कानून में तय समय सीमा के उल्लंघन को क्षमा नहीं किया जाना चाहिए।

कोर्ट की मुख्य बातें:
कोर्ट ने कहा कि महज विभागीय खानापूर्ति या नौकरशाही प्रक्रिया देरी को माफ करने का पर्याप्त कारण नहीं हो सकती। बेंच ने स्पष्ट किया कि अपीलकर्ता देरी का कोई ठोस या वास्तविक कारण बताने में विफल रहे हैं, इसलिए न्यायालय अपने विशेषाधिकार का प्रयोग कर इस असाधारण विलंब को क्षमा नहीं करेगा। कोर्ट ने टिप्पणी की कि वास्तविक न्याय का अर्थ प्रतिपक्षी (दूसरे पक्ष) के अधिकारों को हानि पहुँचाना नहीं है। हाईकोर्ट ने विलंब और लापरवाही के आधार पर नगर निगम की इस रिट अपील को प्रारंभिक चरण में ही निरस्त कर दिया, जिससे निगम के दमकलकर्मी को बड़ी राहत मिली है।




































