BILASPUR NEWS. छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि किसी व्यक्ति की कॉल डिटेल लेना उसके गोपनीयता के अधिकार का उल्लंघन है। कोर्ट ने साफ किया कि भले ही पति-पत्नी के बीच वैवाहिक संबंध हो, लेकिन एक-दूसरे की निजी जानकारी मांगना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत निजता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के खिलाफ है।
बता दें, यह मामला दुर्ग जिले के युवक और राजनांदगांव की युवती से जुड़ा है। दोनों की शादी 4 जुलाई 2022 को हिंदू रीति-रिवाज से हुई थी। शादी के कुछ ही दिनों बाद पत्नी अपने मायके चली गई और व्यवहार में बदलाव आ गया। पति ने आरोप लगाया कि पत्नी ने उसकी मां और भाई के साथ दुर्व्यवहार किया और बार-बार बिना बताए मायके चली जाती थी। इसके बाद पति ने 7 अक्टूबर 2022 को हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 9 के तहत वैवाहिक अधिकारों की पुनःस्थापना के लिए फैमिली कोर्ट में याचिका दायर की।

इसी दौरान पत्नी ने धारा 125 के तहत गुजारा भत्ते के लिए आवेदन दिया और पति सहित उसके माता-पिता और भाई पर घरेलू हिंसा के आरोप लगाए। पति ने 24 जनवरी 2024 को दुर्ग एसएसपी को आवेदन देकर पत्नी की कॉल डिटेल (सीडीआर) की मांग की, ताकि उसके चरित्र पर सवाल खड़े कर सके।
पुलिस ने कॉल डिटेल देने से इनकार कर दिया। इसके बाद पति ने फैमिली कोर्ट में कॉल डिटेल मांगने की अर्जी लगाई, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया। फिर पति ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई।
जस्टिस राकेश मोहन पांडे की सिंगल बेंच ने कहा कि तलाक की अर्जी में पति ने पत्नी के चरित्र पर कोई सीधा आरोप नहीं लगाया है, ऐसे में केवल संदेह के आधार पर कॉल डिटेल मांगना अनुचित है। अंत में हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के फैसले को सही मानते हुए पति की याचिका खारिज कर दी। कोर्ट के इस फैसले को निजता के अधिकार की दिशा में एक मजबूत कदम माना जा रहा है।




































