टीएस सिंहदेव के जी-23 समूह में शामिल होने के आसार

कांग्रेस का असंतुष्ट धड़ा माना जाता है जी-23, पार्टी की कार्यप्रणाली और अध्यक्ष का लेकर सवाल उठा चुके हैं समूह के नेता

लोकेन्द्र सिंह
कांग्रेस की समस्याएं और असंतुष्टों की संख्या लगातार बढ़ती ही जा रही है। पंजाब और राजस्थान के साथ ही छत्तीसगढ़ में भी कांग्रेस हलाकान है। बाबा के नाम से मशहूर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंह देव अपनी उपेक्षा से परेशान है। कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व पर दबाव बनाने के लिए उन्होंने दिल्ली को छत्तीसगढ़ की राजनीति का केंद्र बना दिया है। कांग्रेस के नेतृत्व की उदासीनता से असंतुष्ट बाबा सरकार ने अब अपने कदम ‘जी-23’ की ओर बढ़ा दिए हैं।

चर्चा है कि टीएस सिंह देव ने शनिवार को कांग्रेस आलाकमान को चुनौती देने वाले जी-23  के प्रमुख सदस्य विवेक तन्खा से मुलाकात की। दोनों नेताओं की लंबी मुलाकात चली। माना जा रहा है कि बाबा सरकार सीएम पद की दावेदारी से खुद को दूर होता देख दबाव बनाने की हर सम्भव कोशिश में जुटे हैं। तमाम नेताओं से मेल-मुलाकात के बाद अब उनकी नजर जी-23 पर टिकी है। अगर बाबा भी इस खेमे में शामिल हुए तो जल्द ही जी-23 का स्वरूप जी-24 हो जाएगा। हालांकि आलाकमान जी-23 के दबाव को खारिज कर चुका है। सीडब्ल्यूसी की बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने स्पष्ट संकेत दिया था कि वे पार्टी के फैसलों में किसी तरह का दबाव स्वीकार नहीं करेंगी। खुद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी जी-23 के नेताओं को खरी-खोटी सुना चुके हैं।
गौरतलब है कि टीएस देव पिछले कुछ महीनों से लगातार दिल्ली में जमे हुए हैं। वे कुछ दिनों के लिए रायपुर जाते हैं। लेकिन उनका ज्यादा समय अब दिल्ली में बीतता है।

राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बढ़ते कद और आला नेतृत्व के भरोसे से टीएस देव को लगने लगा कि है कि सीएम बनने का उनका दांव शायद अब नहीं चलेगा। लिहाजा वे मेल-मुलाकात के जरिये दबाव बनाने के साथ नए विकल्प टटोल रहे हैं। विश्वस्त सूत्रों का कहना है कि टीएस देव पिछले दिनों में पार्टी नेताओं से अलग कुछ हाईप्रोफाइल लोगों से भी मिले हैं। उनका फोकस किसी भी तरह से भूपेश बघेल की घेरेबंदी करना है।
इस बीच भूपेश बघेल पूरे छत्तीसगढ़ का दौरा कर रहे हैं। वे जब भी रायपुर होते हैं, उनके यहां  बड़ी संख्या में विधायक मुलाकात के लिए पहुंचते हैं। कई मौकों पर विधायकों ने मुख्यमंत्री के प्रति अपना खुला समर्थन भी जताया है। यूपी का विशेष पर्यवेक्षक बनाये जाने के बाद बघेल का कद और बढ़ा है। इसकी वजह से टी एस देव खुद को अलग थलग महसूस कर रहे हैं।
(लेखक राजनीतिक विश्लेषक एवं स्वत्रंत लेखक हैं। दो दशक से पत्रकारिता में हैं।)