BILASPUR NEWS. छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में रेप के मामले में आरोपी की अपील पर सुनवाई हुई। कोर्ट में पीड़ित के तरफ से जन्मतिथि से संबंधित सही साक्ष्य नहीं जुटाए जाने पर आरोपी को दोष मुक्त किया गया। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुना और पीड़ित पक्ष की ओर से पीड़िता के जन्म से संबंधित कोई भी साक्ष्य नहीं होने पर कोर्ट को फैसला सुनना पड़ा।

बता दें, मामला बस्तर का है। बस्तर निवासी दुष्कर्म पीड़िता ने रिपोर्ट दर्ज करायी थी कि उसके पड़ोस में रहने वाले शादीशुदा व्यक्ति ने 2015 में उसके साथ शारीरिक संबंध बनाया था। उसके बाद लगातार संबंध बनाता रहा। इस घटना की जानकारी उसने परिवार वालों को दी। इसके बाद रिपोर्ट लिखाई गई।पुलिस ने जुर्म दर्ज कर न्यायालय में चालान पेश कर दिया। न्यायालय ने कथित दुष्कर्म के मामले में आरोपी को 20 साल की सजा व अर्थदंड की सजा सुनाई थी।

आरोपी ने सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील पेश की। हाईकोर्ट ने अपील की सुनवाई में पाया कि अभियोजन पक्ष के पास अभियोक्त्री की जन्मतिथि 29 अगस्त 2003 है। अगर उस तारीख पर गौर करें तो जिस तारीख को पीड़िता ने बताया कि पहली बार संभोग हुआ उसकी उम्र 12 साल 2 माह की थी और आखिरी संभोग की तारीख 13 जून 2019 को उसकी उम्र लगभग 16 वर्ष थी। इसके बाद से पीड़िता ने घटना के बारे में परिवार के सदस्य को नहीं बताया लंबे समय तक कथित आखिरी की तारीख पर विचार करते हुए आखिरी बार संभोग के समय उम्र 16 वर्ष थी।

ये भी पढ़ेंःगम्मत देखकर वापस लौटा परिवार तो महिला की लाश मिली फंदे पर लटकती
दाखिला खारिज रजिस्टर में दर्ज जन्मतिथि अभियोजन पक्ष की ओर से इसे चुनौती दी गई तर्क दिया गया है कि कोई विश्वसनीय दस्तावेज नहीं है। गांव के कोटवारी दस्तावेज में जन्म तिथि दर्ज नही है। अभियोजन पक्ष से पीड़िता का पिता जन्म तिथि बताने में भी असमर्थ है। जन्मतिथि पर दाखिल खारिज रजिस्टर के अलावा कोई अन्य दस्तावेज साक्ष्य नहीं है। मेडिकल जांच में यह पाया गया कि पीड़िता संबंध बनाने में अभ्यस्त थी। कोर्ट ने पीड़िता के सहमति देने वाली पार्टी होने के आधार पर अपील स्वीकार कर आरोपी को दोष मुक्त किया है। कोर्ट ने आरोपी को किसी अन्य मामले में आवश्यकता नहीं होने पर रिहा करने का आदेश दिया है।




































