BILASPUR NEWS. छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा कि पत्नी द्वारा बार-बार आत्महत्या की धमकी देना पति के साथ मानसिक क्रूरता है। कोर्ट ने पत्नी की अपील खारिज करते हुए फैमिली कोर्ट द्वारा दिए गए तलाक को सही माना। मामला एक ऐसे दंपती का है, जिसमें पति ने आरोप लगाया कि शादी के समय पत्नी और उसके परिवार ने अपना धर्म छिपाया था।

धमतरी जिले के युवक की 2018 में हिंदू रीति से शादी हुई। युवक का आरोप है कि शादी तय होने पर लड़की और उसका परिवार खुद को हिंदू बताते थे, लेकिन शादी के कुछ महीनों बाद उसे सच्चाई पता चली कि वे मुस्लिम परिवार से हैं। एक बार मंदिर दर्शन जाते समय बाइक के सामने भैंस आ जाने से दंपती दुर्घटनाग्रस्त हो गए और अस्पताल में भर्ती हुए।
इसके बाद पत्नी के पिता ने उन्हें नवागढ़ की एक दर्गाह ले जाकर कहा कि दोनों पर भूत का साया है और हर गुरुवार यहां आने का निर्देश दिया। लगभग 7–8 महीने ऐसा चलता रहा, जिससे पति को पत्नी और उसके परिवार के धार्मिक व्यवहार पर शक होने लगा।

जब पति को सच पता चला कि पत्नी मुस्लिम परिवार से है, तो उसने दर्गाह जाना बंद कर दिया और पत्नी को मायके जाने से भी रोका।
इसके बावजूद पत्नी हर गुरुवार अपने माता-पिता के घर जाने की जिद करती, जिससे विवाद बढ़ता गया।
पति ने आरोप लगाया कि पत्नी और उसके माता-पिता ने उस पर मुस्लिम धर्म अपनाने के लिए दबाव बनाया। पति द्वारा मना करने के बाद पत्नी के व्यवहार में बड़ा बदलाव आ गया और वह अक्सर झगड़ा करने लगी।

अजीब व्यवहार और आत्महत्या की धमकी
पत्नी का झगड़ा बढ़ने लगा। पति ने बताया कि पत्नी उस पर गाली-गलौज करती और छोटी-छोटी बातों पर विवाद करती थी।
25 सितंबर 2019 को एक दिन विवाद इतना बढ़ गया कि पत्नी ने खुद पर केरोसिन डालकर माचिस जलाने की कोशिश की। पति ने किसी तरह उसे बचा लिया। इसके बाद पत्नी अपने माता-पिता के घर चली गई और वापस नहीं लौटी।
तंग आकर पति ने कोर्ट में तलाक की अर्जी दी
लगातार मानसिक तनाव और आत्महत्या की धमकियों से परेशान पति ने न्यायालय में तलाक के लिए याचिका दायर की।
दोनों पक्षों को सुनने के बाद फैमिली कोर्ट ने तलाक मंजूर कर दिया। पत्नी ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी।

ऐसा संबंध निभाना असंभव
हाईकोर्ट ने कहा—बार-बार आत्महत्या की धमकी देना, धार्मिक दबाव, लगातार झगड़ा और मानसिक तनाव पति के लिए असहनीय मानसिक क्रूरता है। इस आधार पर अदालत ने पत्नी की अपील खारिज कर दी और पति को तलाक का हकदार माना।




































