Meerut Divorce Case मेरठ। जहां तलाक को आमतौर पर दुख, बदनामी और सामाजिक कलंक से जोड़ा जाता है, वहीं मेरठ में एक अनोखा और प्रेरणादायक नजारा देखने को मिला। एक रिटायर्ड जज ने अपनी बेटी के तलाक को हार नहीं, बल्कि नई आजादी और खुशी का जश्न मनाया। ढोल-नगाड़ों की गूंज, फूलों के हार और परिवारजनों की खुशी के साथ बेटी का घर वापसी का स्वागत किया गया।

Meerut Divorce Case रिटायर्ड जज ज्ञानेंद्र शर्मा ने अपनी इकलौती बेटी प्रणिता शर्मा का स्वागत उसी सम्मान और गर्व के साथ किया, जिस तरह 2018 में उसकी विदाई की थी। परिवार के सदस्य काली टी-शर्ट पहने नजर आए, जिन पर लिखा था – “I Love My Daughter”। मिठाइयां बांटी गईं और पूरा माहौल उत्सव जैसा बन गया।

यूपी –
मेरठ में शादी के 7 साल बाद प्रणिता शर्मा का मेजर गौरव अग्निहोत्री से तलाक हो गया। तलाक के बाद बेटी अपने घर आई तो ढोल–नगाड़े बजे। बेटी के साथ घरवाले नाचते हुए कोर्ट से घर तक आए। सबने एक जैसी टीशर्ट पहनी थी। जिस पर लिखा था– “I Love My Daughter”.पिता रिटायर जज हैं,… pic.twitter.com/KUwBSgitAH
— Sachin Gupta (@Sachingupta) April 5, 2026
प्रणिता की शादी 14 दिसंबर 2018 को एक आर्मी मेजर से हुई थी। शादी के शुरुआती दिनों से ही ससुराल में उनका व्यवहार कठोर था। समय के साथ मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक प्रताड़ना बढ़ती गई। एक बेटे के जन्म के बावजूद स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। अंत में प्रणिता ने अपने आत्मसम्मान को प्राथमिकता देते हुए तलाक का फैसला लिया।मेरठ फैमिली कोर्ट ने 4 अप्रैल 2026 को तलाक की अर्जी पर मुहर लगा दी। फैसला आने के तुरंत बाद पिता ज्ञानेंद्र शर्मा ने बेटी की घर वापसी को भव्य रूप से मनाया।

Meerut Divorce Case प्रणिता शर्मा शास्त्री नगर स्थित एक ज्यूडिशियल अकादमी में फाइनेंस डायरेक्टर हैं और मनोविज्ञान में पोस्ट ग्रेजुएट हैं। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा, “सबसे जरूरी है खुद को मजबूत बनाना। अगर कोई महिला प्रताड़ना झेल रही है तो चुप न रहे। शिक्षा और आत्मनिर्भरता ही असली ताकत है।”उन्होंने महिलाओं और अभिभावकों से अपील की, “बेटी की शादी जल्दी मत करो। पहले उसे पढ़ाओ, आत्मनिर्भर बनाओ, फिर शादी करो।”

Meerut Divorce Case
पिता ज्ञानेंद्र शर्मा ने समाज को आईना दिखाते हुए कहा, “मेरी बेटी कोई सामान नहीं है जिसे भेज दिया जाए। अगर वह दुखी है तो उसे वापस लाना मेरा कर्तव्य है। मैंने कोई मुआवजा या सामान नहीं लिया, सिर्फ अपनी बेटी की खुशी चुनी।” उन्होंने आगे कहा कि समाज को बेटियों को बोझ नहीं, बल्कि सम्मान और अधिकार के साथ देखना चाहिए। बेटियों को भी खुश रहने का पूरा हक है।




































