NEW DELHI NEWS. मध्य-पूर्व में अमेरिका-ईरान टकराव और होर्मुज जलमार्ग पर बढ़ते तनाव के बीच केंद्र सरकार ने देश में संभावित ईंधन संकट को देखते हुए बड़ा कदम उठाया है। पेट्रोल और डीजल पर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (एक्साइज ड्यूटी) में भारी कटौती की गई है, ताकि वैश्विक स्तर पर बढ़ती कीमतों का असर घरेलू बाजार पर कुछ हद तक नियंत्रित किया जा सके।

सरकार के आदेश के मुताबिक अब पेट्रोल पर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क ₹13 प्रति लीटर से घटाकर ₹3 प्रति लीटर कर दिया गया है। डीजल पर यह शुल्क ₹10 प्रति लीटर से घटाकर शून्य कर दिया गया है। ये सभी बदलाव 26 मार्च 2026 से तत्काल प्रभाव से लागू कर दिए गए हैं। मौजूदा हालात में सबसे बड़ी चिंता होर्मुज स्ट्रेट को लेकर है, जो दुनिया के लिए ऊर्जा आपूर्ति की लाइफलाइन माना जाता है।

वैश्विक कच्चे तेल का करीब 20% हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। रोजाना 20 से 25 मिलियन बैरल कच्चा तेल और करीब 10 अरब घन फुट गैस की सप्लाई इसी मार्ग से होती रही है। नाकाबंदी और तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें तेजी से उछली हैं। सरकार ने पहली बार एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी लागू की है।

ATF पर ₹50 प्रति लीटर टैक्स तय किया गया। छूट के बाद प्रभावी दर ₹29.5 प्रति लीटर रह गई। इससे एयरलाइंस कंपनियों की लागत बढ़ेगी, जिसका असर आने वाले समय में हवाई किराए पर दिख सकता है। सरकार ने घरेलू तेल कंपनियों को राहत देने के लिए कई अहम फैसले भी किए हैं। 2022 में लागू विंडफॉल टैक्स समाप्त कर दिया गया। पेट्रोल, डीजल और ATF के निर्यात पर कई शुल्कों से छूट दी गई।

टैक्स कटौती के बावजूद आम लोगों को पेट्रोल-डीजल सस्ता मिलने की संभावना फिलहाल कम नजर आ रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। भारतीय तेल कंपनियां हर लीटर पर करीब ₹48.8 का नुकसान झेल रही हैं। ऐसे में सरकार द्वारा दी गई राहत का बड़ा हिस्सा कंपनियां अपने घाटे की भरपाई में इस्तेमाल करेंगी।

केंद्र सरकार का यह फैसला वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच एक जरूरी हस्तक्षेप जरूर है, लेकिन आम उपभोक्ताओं के लिए तत्काल राहत की उम्मीद कम है। जब तक अंतरराष्ट्रीय हालात सामान्य नहीं होते, तब तक ईंधन की कीमतों पर दबाव बना रह सकता है।

































