BILASPUR NEWS. छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सेवानिवृत्त शासकीय कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए स्पष्ट किया है कि रिटायरमेंट के छह माह बीत जाने के बाद सामान्य भविष्य निधि (GPF) से किसी भी प्रकार की वसूली कानूनन अवैध है। कोर्ट ने इस आधार पर एक रिटायर्ड लेक्चरर के खिलाफ 12 साल बाद जारी किए गए वसूली आदेश को निरस्त कर दिया।

यह फैसला जांजगीर-चांपा जिले के पामगढ़ निवासी सेवानिवृत्त व्याख्याता लक्ष्मीनारायण तिवारी की याचिका पर सुनाया गया। याचिकाकर्ता 31 जनवरी 2011 को शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय ससहा से सेवानिवृत्त हुए थे। इसके बावजूद महालेखाकार (एजी) कार्यालय रायपुर द्वारा वर्ष 2023 में उनके GPF खाते में ऋणात्मक शेष दर्शाते हुए वसूली आदेश जारी किया गया था। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय एवं ऋषभदेव साहू ने दलील दी कि छत्तीसगढ़ सिविल सेवा पेंशन नियम, 1976 के नियम 65 के अनुसार GPF से संबंधित किसी भी प्रकार की वसूली सेवानिवृत्ति के अधिकतम छह माह के भीतर ही की जा सकती है। इसके बाद की गई कार्रवाई नियमों के विरुद्ध है।

पूर्व निर्णयों का हवाला
कोर्ट के समक्ष जबलपुर हाईकोर्ट के रामनारायण शर्मा बनाम मध्यप्रदेश शासन तथा छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के डी.आर. मंडावी और हृदयनारायण शुक्ला प्रकरणों का भी उल्लेख किया गया, जिनमें समान परिस्थितियों में वसूली को अवैध ठहराया गया था।

कोर्ट का स्पष्ट रुख
मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि सेवानिवृत्ति के 12 वर्ष बाद जारी किया गया वसूली आदेश न केवल नियमों के विपरीत है, बल्कि न्यायसंगत भी नहीं है। अदालत ने एजी कार्यालय रायपुर द्वारा जारी रिकवरी आदेश को निरस्त कर दिया।

हजारों रिटायर्ड कर्मचारियों को राहत
यह निर्णय प्रदेश के हजारों सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए एक महत्वपूर्ण नजीर माना जा रहा है, जिनके खिलाफ वर्षों बाद GPF से वसूली की कार्रवाई की जा रही है।




































