BILASPUR NEWS. छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एकलव्य मॉडल आवासीय स्कूलों (EMRS) में शिक्षकों और गैर-शैक्षणिक पदों पर हो रही सीधी भर्ती को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि लंबे समय से अपनी सेवाएँ दे रहे अतिथि शिक्षकों के अनुभव को नजरअंदाज करना अन्यायपूर्ण होगा। जस्टिस ए.के. प्रसाद की सिंगल बेंच ने आदेश दिया है कि भर्ती प्रक्रिया में याचिकाकर्ता शिक्षकों को उनके अनुभव के आधार पर उचित वरीयता दी जाए।

केंद्र सरकार और ‘नेशनल एजुकेशन सोसाइटी फॉर ट्राइबल स्टूडेंट्स’ ने एकलव्य स्कूलों में रिक्त पदों को भरने के लिए नई भर्ती प्रक्रिया शुरू की थी। इस प्रक्रिया में पहले से कार्यरत अतिथि शिक्षकों के लिए प्राथमिकता या वरीयता का कोई प्रावधान नहीं रखा गया था। इसके खिलाफ प्रदेश भर के विभिन्न जिलों से लगभग 200 से अधिक शिक्षकों ने अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।

शिक्षकों के तर्क: योग्यता और 6 साल का अनुभव
याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि वे साल 2016 से 2022 के बीच सक्षम अधिकारियों द्वारा नियुक्त किए गए थे। उनकी नियुक्ति स्नातकोत्तर (PG) और बीएड जैसी निर्धारित शैक्षणिक योग्यताओं के आधार पर हुई थी। वे दुर्गम क्षेत्रों के स्कूलों में पिछले 6 वर्षों से अधिक समय से निष्ठापूर्वक सेवा दे रहे हैं। अचानक नई भर्ती के जरिए उन्हें बाहर करना असंवैधानिक और उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ है।

हाईकोर्ट की टिप्पणी
मामले की सुनवाई के बाद जस्टिस ए.के. प्रसाद ने कहा कि लंबे समय से कार्यरत अतिथि शिक्षकों की सेवाओं और उनके अनुभव को पूरी तरह नजरअंदाज करना अनुचित है। भर्ती प्रक्रिया के दौरान उनके पिछले कार्यकाल को समुचित महत्व दिया जाना चाहिए।

कोर्ट ने केंद्रीय भर्ती प्रक्रिया की वैधता को तो बरकरार रखा है, लेकिन विभाग को कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं कि नियुक्ति के समय इन अनुभवी अतिथि शिक्षकों को वरीयता दी जाए और उनकी सेवा निरंतरता पर विचार किया जाए ताकि उनका अनुभव व्यर्थ न जाए।




































