RAIPUR NEWS. छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सरकार ने सत्ता संभालते ही यह स्पष्ट कर दिया कि राज्य की प्राथमिकता सिर्फ योजनाओं की घोषणा नहीं, बल्कि नीति, अमल और असर के जरिए विकास और शांति को साथ-साथ आगे बढ़ाना है। सरकार का फोकस उन इलाकों पर है, जहां वर्षों तक नक्सल हिंसा, अविकसित आधारभूत ढांचे और शासन की कमजोर पहुंच ने विकास की रफ्तार थाम रखी थी। राज्य गृह विभाग और पुलिस मुख्यालय के आंकड़ों के मुताबिक, नक्सल प्रभावित जिलों में सुरक्षा कैंपों की संख्या बढ़ाई गई, सड़क और मोबाइल कनेक्टिविटी को प्राथमिकता दी गई। गृह विभाग की रणनीति का आधार एरिया डॉमिनेशन + विकास डिलीवरी रहा, जिससे कई इलाकों में स्कूल, आंगनबाड़ी और राशन दुकानों की नियमितता बहाल हुई। सरकार का मानना है कि स्थायी शांति केवल सुरक्षा कार्रवाई से नहीं, बल्कि सरकारी सेवाओं की भरोसेमंद पहुंच से आती है।

केंद्रीय गृह मंत्रालय की ताज़ा समीक्षा के मुताबिक, अब छत्तीसगढ़ में केवल तीन जिले (बीजापुर, सुकमा, नारायणपुर) सबसे प्रभावित श्रेणी में हैं, जो पहले के छह की तुलना में कम हुए हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि नक्सल प्रभाव धीरे-धीरे घट रहा है। सरकार के आंकड़ों के अनुसार, 2025 में सुरक्षा बलों ने दो सैकड़ों से अधिक नक्सलियों को निष्क्रिय किया, सैकड़ों गिरफ्तार किए और हजार से ज्यादा नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया, जिसका सीधा असर स्थानीय स्थिरता पर देखा जा रहा है। लोक निर्माण विभाग और ग्रामीण विकास विभाग के अनुसार, साय सरकार ने सड़क, पुल और ग्रामीण संपर्क मार्गों को तेज़ी से मंजूरी दी। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना और राज्य योजनाओं के तहत दूरस्थ गांवों को ब्लॉक और जिला मुख्यालयों से जोड़ने का काम प्राथमिकता पर है।

राज्य सरकार ने 2025-26 के बजट में बस्तर जैसे नक्सल प्रभावित क्षेत्रों पर विशेष फ़ोकस रखा है। इसके तहत पर्यटन, सुरक्षा, आधारभूत ढांचा, सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार जैसे सेक्टरों में बड़े निवेश का निर्णय लिया गया। अधिकारियों ने बताया है कि इससे न केवल इन इलाकों में विकास बढ़ेगा, बल्कि स्थानीय लोगों की जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव आएगा। बजट के हिस्से के रूप में बस्तर के लिए 3,200 अतिरिक्त बस्तर फाइटर जैसे सुरक्षा पद सृजित किए जा रहे हैं और नए पुलिस थाना भी स्थापित किए जा रहे हैं ताकि कानून-व्यवस्था और सेवा वितरण बेहतर तरीके से सुनिश्चित हो सके।
आदिवासी और ग्रामीण नीति: भरोसे की वापसी
आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, वन अधिकार पट्टों के वितरण, छात्रवृत्ति और छात्रावास सुविधाओं की मॉनिटरिंग को सख्त किया गया। पीएम जनमन योजना और राज्य की आदिवासी कल्याण योजनाओं के जरिए विशेष पिछड़े जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य और आवास सेवाएं पहुंचाई जा रही हैं। सरकार का स्पष्ट रुख है कि आदिवासी क्षेत्रों में विकास का मतलब स्थानीय संस्कृति और अधिकारों के साथ प्रगति होना चाहिए।

सुशासन का आधार: डिजिटल और पारदर्शी सिस्टम
राज्य सामान्य प्रशासन विभाग और आईटी विभाग के अनुसार, साय सरकार ने ई-ऑफिस, ऑनलाइन सेवाओं और समयबद्ध समाधान प्रणाली को मजबूत किया। इससे शिकायत निवारण, फाइल मूवमेंट और योजनाओं की ट्रैकिंग आसान हुई। सरकार का दावा है कि इससे न केवल भ्रष्टाचार पर अंकुश लगा, बल्कि नीति का असर ज़मीन पर दिखने लगा। कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार, किसानों को समय पर बीज, खाद और समर्थन मूल्य का लाभ देने के लिए विभागीय समन्वय बढ़ाया गया। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि और राज्य योजनाओं के तहत भुगतान की निगरानी सीधे जिला स्तर से की जा रही है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नकदी प्रवाह बढ़ा है।
बुनियादी ढांचा और कनेक्टिविटी पर जोर
केंद्र और राज्य सरकार की साझा योजनाओं के तहत छत्तीसगढ़ को रिमोट और पूर्व में असुरक्षित इलाकों तक सड़क, पुल और अन्य कनेक्टिविटी इंफ्रास्ट्रक्चर पहुंचाने के लिए रुपए 195 करोड़ से अधिक की राशि मंज़ूर की गई है। इन सड़कों का लक्ष्य न केवल सड़क सुरक्षा को बढ़ाना है, बल्कि ग्रामीण और आदिवासी इलाकों को स्वास्थ्य, शिक्षा और बाजार से जोड़कर समाज-आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करना भी है।
सीएम साय बोले- छत्तीसगढ़ विकास के रास्ते से आएगी स्थायी शांति
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने विकास और शांति के एजेंडे को लेकर साफ कह चुके हैं कि छत्तीसगढ़ में बंदूक के नहीं, विकास के रास्ते से स्थायी शांति आएगी। हमारी सरकार का लक्ष्य है कि अंतिम व्यक्ति तक सड़क, स्कूल, अस्पताल और रोजगार पहुंचे। जब शासन लोगों के जीवन में भरोसे के साथ पहुंचेगा, तब नक्सलवाद जैसी समस्याएं खुद कमजोर होंगी। सीएम साय का कहना है कि सरकार की हर नीति का केंद्र आम नागरिक है—खासकर आदिवासी और ग्रामीण इलाकों के लोग। उन्होंने यह भी दोहराया कि सुरक्षा बलों के साथ-साथ प्रशासनिक तंत्र की जिम्मेदारी है कि विकास योजनाओं का लाभ समय पर और बिना भेदभाव के मिले।




































