BILASPUR NEWS. जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, बिलासपुर ने बीमा क्लेम के एक मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए मैक्स लाइफ इंश्योरेंस कंपनी को कड़ी फटकार लगाई है। आयोग ने कंपनी को आदेश दिया है कि वह परिवादी को 1 करोड़ रुपये की बीमा राशि 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ अदा करे। इसके साथ ही, मानसिक प्रताड़ना और कानूनी खर्च के रूप में 2 लाख रुपये का अतिरिक्त भुगतान करने का भी निर्देश दिया गया है।

बिलासपुर निवासी कौशल प्रसाद कौशिक ने अपनी पत्नी शैल कौशिक के नाम पर मई 2020 में मैक्स लाइफ इंश्योरेंस से प्लेटिनम वेल्थ प्लान के तहत 1 करोड़ रुपये का जीवन बीमा लिया था। इस पॉलिसी के लिए प्रति वर्ष 10 लाख रुपये का प्रीमियम भुगतान किया जा रहा था। सितंबर 2020 में शैल कौशिक कोविड-19 से संक्रमित हुईं और 11 अक्टूबर 2020 को इलाज के दौरान उनका निधन हो गया।

कंपनी ने क्यों खारिज किया था क्लेम?
मृत्यु के बाद जब पति ने क्लेम के लिए आवेदन किया, तो बीमा कंपनी ने यह कहते हुए दावा खारिज कर दिया कि महिला को 2016 से हृदय संबंधी गंभीर बीमारी थी, जिसे पॉलिसी लेते समय छिपाया गया था। कंपनी ने क्लेम राशि देने के बजाय केवल जमा प्रीमियम की रकम लौटा दी थी।

आयोग की कड़ी टिप्पणी
आयोग के अध्यक्ष आनंद कुमार सिंघल, सदस्य पूर्णिमा सिंह और आलोक कुमार पाण्डेय की पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान पाया कि पॉलिसी जारी करने से पहले बीमा कंपनी ने अपने पैनल के डॉक्टरों से दो अलग-अलग अस्पतालों में महिला की पूरी मेडिकल जांच करवाई थी, जिसमें उन्हें ‘पूरी तरह स्वस्थ’ पाया गया था। कंपनी यह साबित करने में पूरी तरह विफल रही कि कथित बीमारी पॉलिसी लेने से पहले की श्रेणी में आती है। आयोग ने स्पष्ट किया कि केवल पुराने रिकॉर्ड या अनुमान के आधार पर क्लेम खारिज करना ‘उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम’ के तहत सेवा में गंभीर लापरवाही और कमी है। जब बीमा कंपनी ने खुद की मेडिकल जांच के बाद व्यक्ति को स्वस्थ मानकर पॉलिसी जारी की और प्रीमियम लिया, तो बाद में बीमारी का बहाना बनाकर क्लेम से हाथ नहीं खींचा जा सकता।



































