BILASPUR NEWS. छत्तीसगढ़ के एकमात्र पत्रकारिता विश्वविद्यालय, कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय में शिक्षकों की नियुक्तियों में कथित अनियमितता का मामला अब गरमा गया है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने इस मामले में दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए विश्वविद्यालय प्रबंधन को कड़ा निर्देश दिया है कि वे दो महीने के भीतर इस विवाद पर निर्णय लें।

क्या है पूरा मामला?
यह याचिका डॉ. शिवकृपा मिश्रा द्वारा दायर की गई है। याचिका में विश्वविद्यालय के दो प्रमुख पदों पर हुई नियुक्तियों को नियमों के विरुद्ध बताया गया है: पंकज नयन पांडेय: एसोसिएट प्रोफेसर पद पर नियुक्ति। राजेंद्र मोहंती: असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर नियुक्ति।
याचिकाकर्ता का आरोप है कि इन नियुक्तियों में यूजीसी (UGC) के न्यूनतम मानकों और मेरिट लिस्ट की पूरी तरह अनदेखी की गई है। मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं आरोप है कि जिन उम्मीदवारों के पास पीएचडी की अनिवार्य उपाधि नहीं थी, उन्हें नियमों को ताक पर रखकर नियुक्त कर दिया गया।

असिस्टेंट प्रोफेसर राजेंद्र मोहंती के बारे में दावा किया गया है कि उनका नाम मेरिट लिस्ट में था ही नहीं, फिर भी उन्हें नौकरी दे दी गई, जबकि योग्य उम्मीदवारों को इसकी सूचना तक नहीं मिली। साल 2023 में उच्च शिक्षा विभाग द्वारा गठित एक जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में गड़बड़ी की पुष्टि की थी, लेकिन विश्वविद्यालय प्रबंधन ने इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।

पूर्व में भी हो चुकी है कार्रवाई
उच्च शिक्षा विभाग के निर्देश पर पहले भी इस तरह की अनियमितता के कारण जनसंचार विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. शहीद अली को बर्खास्त किया जा चुका है। उनके स्थान पर डॉ. प्रमोद जेना की नियुक्ति की गई थी, लेकिन आरोप है कि इस नियुक्ति में भी यूजीसी गाइडलाइंस का पालन नहीं हुआ क्योंकि उम्मीदवार के पास केवल एम.ए. की डिग्री थी।
हाईकोर्ट का रुख
डॉ. शिवकृपा मिश्रा ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने पहले विश्वविद्यालय प्रशासन से लिखित शिकायत की थी, लेकिन कोई सुनवाई न होने पर उन्हें हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा। हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए स्पष्ट किया कि शिकायतों पर विचार करना और न्याय सुनिश्चित करना न्यायालय की जिम्मेदारी है। कोर्ट ने अब प्रबंधन को दो माह की समय सीमा दी है।




































