RAIPUR NEWS. सरकारी योजनाएं समय पर पूरी हों और फाइलों में अटकी न रहें—इसी सोच के साथ शुरू किया गया प्रगति पोर्टल आज नए भारत की नई कार्य संस्कृति की पहचान बन चुका है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि यह डिजिटल प्लेटफॉर्म सिर्फ निगरानी का माध्यम नहीं, बल्कि जवाबदेही, पारदर्शिता और तेज फैसलों का मजबूत सिस्टम है। राजधानी रायपुर में प्रगति पोर्टल पर आयोजित प्रेसवार्ता में मुख्यमंत्री ने बताया कि इस प्लेटफॉर्म के जरिए देशभर में 85 लाख करोड़ रुपये से अधिक की 3,300 से ज्यादा बड़ी परियोजनाओं को गति मिली है।

इसके साथ ही केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल से कई वर्षों से अटकी योजनाएं अब जमीन पर उतर रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रगति का मतलब है—प्रो-एक्टिव गवर्नेंस और टाइमली इम्प्लीमेंटेशन, यानी पहले से तैयारी और समय पर काम। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं नियमित समीक्षा बैठकों के जरिए अधिकारियों से सीधे फीडबैक लेते हैं, जिससे देरी और लापरवाही पर लगाम लगी है। अब तक 50 से ज्यादा उच्चस्तरीय बैठकें हो चुकी हैं। छत्तीसगढ़ की बात करें तो राज्य में 6.11 लाख करोड़ रुपये की लागत वाली 99 राष्ट्रीय अवसंरचना परियोजनाएं चल रही हैं। इनमें से 50 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जबकि बाकी तेजी से आगे बढ़ रही हैं।

प्रगति पोर्टल पर दर्ज राज्य से जुड़े 200 मामलों में से 183 का समाधान किया जा चुका है, यानी 91 प्रतिशत से ज्यादा सफलता दर। सड़क, बिजली, रेलवे, कोयला और स्टील जैसे अहम सेक्टरों में वर्षों से अटकी समस्याओं का समाधान हुआ है। भिलाई स्टील प्लांट के आधुनिकीकरण और लारा सुपर थर्मल पावर प्रोजेक्ट जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स को भी इसी प्लेटफॉर्म से नई रफ्तार मिली है, जिससे उद्योग और रोजगार दोनों को फायदा हुआ है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रगति पोर्टल मिनिमम गवर्नमेंट और मैक्सिमम गवर्नेंस की सोच को जमीन पर उतार रहा है। यही वजह है कि इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि छत्तीसगढ़ सरकार विकास कार्यों को समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से पूरा करने के लिए इसी तरह तकनीक का अधिकतम उपयोग करती रहेगी।




































