KANKER NEWS. आज सिविल अस्पताल पखांजूर में स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह ठप है। क्योंकि स्वास्थ्य कर्मियों ने ओपीडी बंद कर दी है। जिससे इलाज की आस लेकर पहुंचे मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। घंटों से मरीज अस्पताल परिसर के बाहर बैठे रहे, लेकिन न कोई पूछने वाला और न ही कोई इलाज हो सका। अस्पताल के भीतर सन्नाटा पसरा रहा। इस हड़ताल की वजह बनी बीती रात की एक गंभीर घटना। जहां स्थानीय भाजपा नेताओं पर महिला स्वास्थ्य कर्मी से बदसलूकी और अस्पताल में ताला जड़ने के आरोप लगे हैं। जानिए क्या है पूरा मामला।

पखांजूर का सिविल अस्पताल राजनीति का शिकार होता नजर आ रहा है। बीती रात भाजपा के पखांजूर मंडल अध्यक्ष दीपांकर राय अपने समर्थकों के साथ अस्पताल पहुंचे। आरोप है कि स्टाफ की कमी और बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर जमकर हंगामा किया गया। इस दौरान एक महिला डॉक्टर से अभद्र व्यवहार किया गया और आक्रोश में आकर अस्पताल के मुख्य गेट में ताला तक जड़ दिया गया।
हंगामे की सूचना मिलते ही तहसीलदार मौके पर पहुंचे और समझाइश के बाद ताला खुलवाया गया। लेकिन इस घटना से आहत स्वास्थ्य कर्मियों ने आज ओपीडी और इलाज सेवाएं बंद कर दी। इसका सीधा खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ा। इस पूरे घटनाक्रम ने विपक्ष को भी बैठे-बिठाए बड़ा मुद्दा दे दिया है।

कांग्रेस के पखांजूर मंडल अध्यक्ष राजदीप हालदार ने भाजपा पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि सत्ता में रहते हुए भाजपा के लोग खुद अपनी सरकार की व्यवस्था के खिलाफ सड़क पर उतर आए हैं। अस्पताल में ताला जड़ना इस बात का प्रमाण है कि स्वास्थ्य व्यवस्था कितनी बदहाल है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि कुछ दिन पहले ही कांग्रेस ने स्वास्थ्य सेवाओं को दुरुस्त करने के लिए 18 दिनों का आंदोलन किया था। कांग्रेस की सलाह है कि अस्पताल में ताला लगाने के बजाय उन जनप्रतिनिधियों के घरों में ताला लगाया जाए, जो व्यवस्था सुधारने के लिए जिम्मेदार हैं।

फिलहाल हालात ये हैं कि सिविल अस्पताल पखांजूर में ओपीडी और इलाज पूरी तरह बंद है। दूर-दराज़ के गांवों से आए मरीज और उनके परिजन बेहाल हैं। सवाल ये है कि राजनीति और हंगामे की इस लड़ाई में मरीजों की सेहत की जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा?




































