RAIPUR. विश्व प्रसिद्ध बस्तर अंचल को छत्तीसगढ़ के अन्य भाग को रेलवे से जोड़ने आंदोलन की तैयारी की जा रही है। रावघाट परिजनों में हो रही देरी के लिए लोगों में आक्रोश है। लोगों का कहना है कि जल्द ही इसे पूरा किया जाए नहीं तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

बस्तर संभाग को रायपुर रेलमार्ग से जोड़ने के लिए रावघाट रेललाइन निर्माण परियोजना में देरी से बस्तर के लोगों में व्याप्त गुस्सा बढ़ते जा रहा है। एक दिवसीय विरोध प्रदर्शन और पदयात्रा के बाद अब अंचल के लोग बस्तर बंद की तैयारी कर रहे है। बस्तर रेल आंदोलन समिति के बैनर तले 26 से 30 दिसंबर के बीच बस्तर संभाग को बंद करने की तैयारी की जा रही है।

– छह दशक से प्रस्तावित है रेलवे लाइन
अंचल वासियों का कहना है कि बस्तर में रेलवे लाइन का प्रस्ताव छह दशक पुराना है। लोगों का कहना है कि यहां उस हिस्से का निर्माण कर लिया गया है जहां से आयरन अयस्क का दोहन किया जा सके। मगर बस्तर वासियों को छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर, भिलाई, दुर्ग, बिलासपुर और अन्य मैदानी क्षेत्रों से नहीं जोड़ा जा रहा है। बस्तर वासियों ने कहा कि राजधानी तक सीधी रेल सेवा की उम्मीदें धरी की धरी रह गई। दो चरणों में इस रेल लाइन का काम प्रस्तावित किया गया था।

अगर रावघाट से जगदलपुर तक रेल लाइन शुरू की जाती है तो एक सौ 40 किलोमीटर लंबी रेल लाइन ही बिछाई जानी है, जो रेलवे के लिहाज से छोटा काम है। लोगों ने कहा कि इस कार्य को जामा पहनाने के लिए बस्तर रेलवे प्राइवेट लिमिटेड का गठन किया गया था। कंपनी ने इस परियोजना से अपना हाथ पीछे खींचने रेलवे बोर्ड को पत्र भी लिखा है। इसके बाद से पूरा काम ठप पड़ा हुआ है। लिहाजा शीघ्र ही बस्तर में रेल लाइन को लेकर एक और आंदोलन की तैयारी जोर-शोर से की जा रही है।

– पहले बड़े कंपनियों के साथ हुआ था MOU
लोगों ने बताया कि लौह अयस्क और माइनिंग के परिवहन को देखते हुए देश की चार बड़ी कंपनियां इस रेलमार्ग के निर्माण के लिए MOU कर चुकी है। इसमें NMDC, SAIL, इस्कॉन और छत्तीसगढ़ मिनिरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन शामिल है। MOU के बाद इस रेलमार्ग का कार्य शुरू भी किया गया था।





































