तीरंदाज, भिलाई। भिलाई इस्पात संयंत्र के मैत्रीबाग जू मंगलवार को सफेद बाघ की मौत हो गई। सफेद बाग बीते तीन माह से कैंसर से पीड़ित था और उसका मैत्री बाग में ही इलाज चल रहा था। मंगलवार को उसकी तबीयत अचानक बिगड़ी और उसकी मौत हो गई। मंगलवार देर शाम जू प्रबंधन ने पोस्टमार्टम के बाद सफेद बाघ का अंतिम संस्कार कर दिया।


मिली जानकारी के अनुसार मैत्रीबाग जू का सफेद बाघ किशन कैंसर से लंबी लड़ाई लड़ने के बाद मंगलवार को अंतिम सांस ली। सफेद बाघ किशन का जन्म 2013 में हुआ था। सफेद बाघ सुंदर व कमला की संतान किशन पिछले करीब एक साल से बीमार चल रहा था। तीन माह पहले ही उसे कैंसर होने की पुष्टि हुई थी। उसका उपचार अंजोरा पशु चिकित्सालय के वाइल्ड लाइफ विशेषज्ञ चिकित्सक के मार्ग दर्शन में काफी समय से चल रहा था।

खाना छोड चुका था किशन
मैत्री बाग के प्रभारी डॉ जैन ने बताया कि पिछले तीन दिनों से किशन की तबीयत ज्यादा बिगड़ गई थी। इस बीच उसने खाना पीना भी छोड़ दिया था। इसके अलावा लगातार उसकी डॉक्टरों द्वारा जांच की जा रही थी। मंगलवार को उसकी मौत के बाद जू प्रबंधन ने पहले तो उसका पीएम कराया। उसके बाद जू में ही उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया।

अब बच गए हैं पांच सफेद बाग
सफेद बाग किशन की मौत के बाद मैत्रीबाग जू में अब पांच सफेद बाग बच गए हैं। भिलाई के मैत्री बाग जू ने देशभर के अलग अलग जू को सफेद बाघ दिए हैं। किशन की मौत से पहले यहां 6 सफेद बाघ हुआ करते थे अब इसकी मौत के बाद पांच बच गए हैं। भिलाई मैत्रीबाग द्वारा देश के अलग अलग जू को 12 सफेद बाघ दिए हैं। भिलाई का मैत्री बाग जू हमेशा से ही सफेद बाग के कुनबे को बढ़ाने में आगे रहा है।





































